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by-Ravindra Sikarwar

दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले के पास 10 नवंबर 2025 को हुए विनाशकारी कार विस्फोट की जांच में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने रफ्तार पकड़ ली है। इस हादसे में कम से कम 13 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 27 से अधिक लोग घायल हुए हैं। केंद्र सरकार ने इसे स्पष्ट रूप से ‘आतंकी घटना’ करार दिया है और दोषियों को सख्त सजा देने का वादा किया है। जांच से पता चला है कि यह विस्फोट अल-कायदा से जुड़े एक ‘श्वेतपट्टी’ (व्हाइट-कॉलर) आतंकी मॉड्यूल का हिस्सा था, जो जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में सक्रिय था। इस नेटवर्क का पर्दाफाश जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा श्रीनगर के बाहरी इलाकों में जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) के प्रचार पोस्टर्स की जांच से शुरू हुआ था।

घटना का पूरा विवरण:
10 नवंबर 2025 की शाम करीब 6:52 बजे दिल्ली के व्यस्त चांदनी चौक इलाके में लाल किले के निकट एक सफेद रंग की ह्युंडई i20 कार में जोरदार धमाका हुआ। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि कार पूरी तरह ध्वस्त हो गई, आसपास की 10-12 गाड़ियां आग की लपटों में घिर गईं, और नजदीकी इमारतों के शीशे टूट गए। धमाके की आवाज सैकड़ों मीटर दूर तक सुनाई दी। शुरुआती जांच में फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (एफएसएल) ने पुष्टि की कि विस्फोट अमोनियम नाइट्रेट फ्यूल ऑयल (एएनएफओ) और अन्य विस्फोटक पदार्थों से हुआ, जो कार में छिपाए गए थे।

सीसीटीवी फुटेज से पता चला कि कार फरीदाबाद (हरियाणा) से दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के रास्ते आई थी। ड्राइवर ने कार को लाल किले के पास पार्क किया और ट्रिगर दबाया। यह घटना संभवतः एक सुसाइड अटैक थी, क्योंकि मुख्य आरोपी डॉ. उमर उन नबी खुद विस्फोट में मारा गया। नबी का शव डीएनए टेस्ट से पुष्टि हो चुका है। वह मार्च 2024 में कश्मीर से दिल्ली आया था और फरीदाबाद के अल-फलाह मेडिकल कॉलेज में काम करता था। जांचकर्ताओं का मानना है कि नबी को जम्मू-कश्मीर और हरियाणा पुलिस की हालिया छापेमारियों से डर लग गया था, जिसके बाद उसने घबरा कर यह कदम उठाया।

एनआईए की छापेमारियां और गिरफ्तारियां:
घटना के एक दिन बाद ही 11 नवंबर 2025 को केस को एनआईए को सौंप दिया गया। गृह मंत्री अमित शाह ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की और निर्देश दिए कि हर संदिग्ध को ट्रैक किया जाए। एनआईए ने जम्मू-कश्मीर पुलिस, दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल, हरियाणा पुलिस, यूपी एटीएस, गुजरात एटीएस, एनएसजी और आईबी के सहयोग से मल्टी-स्टेट ऑपरेशन शुरू किया।

  • नूंह (हरियाणा) में मुस्तकीम की हिरासत: नूंह जिले के फिरोजपुर झिर्का इलाके में 13 नवंबर को मुस्तकीम नामक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया। वह डॉ. मुजम्मिल शकील का करीबी सहयोगी है, जो आतंकी मॉड्यूल का मुख्य सूत्रधार माना जा रहा है। मुस्तकीम 9 नवंबर को दिल्ली पहुंचा था और संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त था। पूछताछ में उसने खुलासा किया कि वह नबी को लॉजिस्टिक सपोर्ट दे रहा था। नूंह में सीसीटीवी फुटेज से नबी को मेवात टोल पर देखा गया, जहां मुस्तकीम ने उसे सहायता दी।
  • तीन डॉक्टरों की गिरफ्तारी: फरीदाबाद के अल-फलाह यूनिवर्सिटी और मेडिकल कॉलेज से जुड़े तीन डॉक्टरों—डॉ. मुजम्मिल शकील गनाई, डॉ. आदिल रदर और डॉ. शाहीं सईद—को गिरफ्तार किया गया। ये सभी कश्मीर मूल के हैं और ‘रेडिकलाइज्ड’ डॉक्टर्स के नेटवर्क का हिस्सा थे। शकील और रदर को 8-10 नवंबर के बीच गिरफ्तार किया गया। ये डॉक्टर सतहरी पुर (उत्तर प्रदेश) और फरीदाबाद में किराए के मकानों से संचालित हो रहे थे। पूछताछ में पता चला कि वे जेईएम और अल-कायदा की सहयोगी संगठन अंसार गजवात-उल-हिंद (एजीयूएच) से जुड़े थे।

अन्य गिरफ्तारियां: पुलवामा से तारिक, सहरानपुर (यूपी) से आमिर, और मेवात से मौलवी हाफिज मोहम्मद इश्तियाक को हिरासत में लिया गया। कुल 8-10 संदिग्ध गिरफ्तार हो चुके हैं।

बरामद सामग्री और मॉड्यूल का खुलासा:
छापेमारियों में भारी मात्रा में विस्फोटक पदार्थ जब्त हुए:

  • फरीदाबाद के फतेहपुर टागा गांव से 2,563 किलोग्राम संदिग्ध विस्फोटक (अमोनियम नाइट्रेट सहित)।
  • अमन विहार कॉलोनी से 360 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट, 20 टाइमर डिवाइस, असॉल्ट राइफल्स, हैंडगन्स, डेटोनेटर, केमिकल्स और गोला-बारूद।
  • कुल 2,900 किलोग्राम से अधिक सामग्री, जो पैन-इंडिया हमलों की योजना का हिस्सा थी।

यह मॉड्यूल श्रीनगर में जेईएम पोस्टर्स की जांच से उजागर हुआ। तकनीकी निगरानी से पता चला कि ये लोग सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड ऐप्स के जरिए संपर्क में थे। मकसद था दिल्ली-एनसीआर में सीरियल ब्लास्ट करना, जिसमें रासायनिक हथियारों का भी इस्तेमाल हो सकता था।

सरकारी प्रतिक्रिया और आगे की कार्रवाई:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 नवंबर को एलएनजेपी अस्पताल जाकर घायलों से मुलाकात की और कहा, “षड्यंत्रकारियों को न्याय के कठघरे में खड़ा किया जाएगा।” गृह मंत्रालय ने इसे ‘आतंकी घटना’ घोषित कर एनआईए को पूर्ण अधिकार दिए। अल-फलाह यूनिवर्सिटी पर नेशनल असेसमेंट एंड एक्रेडिटेशन काउंसिल (एनएएसी) ने शो-कॉज नोटिस जारी किया।

जांच जारी है: दो और मॉड्यूल्स की तलाश चल रही है। रेड फोर्ड इकोस्पोर्ट और मारुति ब्रेजा जैसी संदिग्ध गाड़ियां बरामद हुई हैं। यूपी और हरियाणा में हाई अलर्ट है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना भारत की आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों को उजागर करती है, लेकिन हालिया सफलताओं (जैसे सितंबर 2025 में यूपी में एक्यूआईएस ऑपरेटिव की गिरफ्तारी) से आतंकवाद पर लगाम लग रही है।

यह जांच न केवल दोषियों को सजा दिलाएगी, बल्कि भविष्य के खतरों को रोकने में भी मदद करेगी।

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