By: Yogendra Singh
Communal violence : जबलपुर के सिहोरा इलाके में मंदिर और मस्जिद के आमने-सामने होने के कारण तनाव के चलते हिंसा फैल गई। दुर्गा मंदिर में आरती के समय कुछ युवकों ने ग्रिल तोड़कर तोड़फोड़ शुरू कर दी। इसके बाद बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर निकल आए और पत्थरबाजी की। घटना में उपद्रवियों ने लाठी-डंडे और पत्थर का इस्तेमाल किया।

तेज लाउडस्पीकर आवाज से बढ़ा विवाद
Communal violence जानकारी के अनुसार, हिंसा की शुरुआत मंदिर में आरती के दौरान बज रहे स्पीकर की तेज आवाज के कारण हुई। विशेष समुदाय के लोग आवाज से नाराज हुए और दोनों पक्षों में कहासुनी होने लगी। छोटी बहस ने देखते ही देखते हिंसा का रूप ले लिया। स्थानीय लोगों के अनुसार, विवाद सिर्फ आवाज का ही नहीं, बल्कि इलाके में मंदिर और मस्जिद के नजदीक होने से पहले से मौजूद तनाव का परिणाम भी था।
मंदिर और मस्जिद का आमने-सामने होना बढ़ाता रहा तनाव
Communal violence घटना सिहोरा के वार्ड नंबर 5, आजाद चौक में हुई। यहां दुर्गा मंदिर और अहले सुन्नत मदीना मस्जिद आमने-सामने स्थित हैं। रमजान के महीने की शुरुआत के साथ ही इलाके में पहले से ही तनाव की स्थिति बनी हुई थी। स्थानीय लोगों ने बताया कि दोनों धार्मिक संस्थानों के पास होने के कारण कभी भी टकराव की संभावना बनी रहती है।
पुलिस और प्रशासन ने किया काबू
Communal violence हिंसा की सूचना मिलते ही भारी पुलिस फोर्स मौके पर पहुंचा। जबलपुर रेंज के आईजी, डीआईजी, जिले के कलेक्टर और एसपी सहित वरिष्ठ अधिकारी सीधे स्थल पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रण में लाया। पुलिस ने दो दर्जन से अधिक उपद्रवियों की पहचान की, जिनमें से 15 से ज्यादा को हिरासत में लिया गया। उपद्रवियों की गाड़ियों को जब्त कर, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी भी शुरू कर दी गई है।

जबलपुर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने कहा, “हमने स्थिति को तुरंत नियंत्रण में लिया। कानून और शांति बहाल करने के लिए सभी कदम उठाए जा रहे हैं।” वहीं, एसपी सम्पत उपाध्याय ने बताया कि “उपद्रवियों की पहचान कर हिरासत में लिया गया है। शहर में शांति बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया है।”
स्थानीय प्रशासन का लक्ष्य है कि घटना के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रहे और धार्मिक सद्भाव बनाए रखा जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि मंदिर और मस्जिद के बीच संवाद और नियमित संचार ही भविष्य में ऐसे विवादों को रोक सकता है।
यह घटना एक बार फिर यह दर्शाती है कि धार्मिक स्थलों के नजदीकी इलाकों में तनाव के प्रबंधन और समुदायों के बीच शांति बनाए रखने के लिए प्रशासन को सतर्क रहना आवश्यक है।
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