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Report by: Ishu Kumar

Chhattisgarh : छत्तीसगढ़ की राजनीति इन दिनों वैचारिक मतभेदों से निकलकर अब सीधे ‘पोस्टर वॉर’ और तीखी बयानबाजी पर उतर आई है। राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित “धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026” को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तलवारें खिंच गई हैं। जहाँ भारतीय जनता पार्टी इसे राज्य की सांस्कृतिक सुरक्षा के लिए कवच बता रही है, वहीं कांग्रेस इसे ध्रुवीकरण की राजनीति करार दे रही है। इस विवाद ने तब और तूल पकड़ लिया जब सोशल मीडिया पर ‘धर्मांतरण गैंग’ जैसे शब्दों का प्रयोग करते हुए आक्रामक प्रचार शुरू हुआ।

‘धर्मांतरण गैंग’ पोस्टर से मचा बवाल

Chhattisgarh बीजेपी ने इस प्रस्तावित कानून के समर्थन में सोशल मीडिया पर एक बेहद आक्रामक अभियान छेड़ दिया है। पार्टी द्वारा साझा किए गए एक पोस्टर ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, जिसमें स्पष्ट रूप से लिखा गया है— ‘धर्मांतरण गैंग में डर और खलबली…’।

भाजपा का तर्क है कि राज्य के भोले-भले आदिवासी और पिछड़े वर्गों को प्रलोभन देकर उनका धर्मांतरण कराया जा रहा है, और यह नया कानून ऐसी ‘गैंग्स’ की कमर तोड़ने का काम करेगा। पार्टी के नेताओं का कहना है कि यह विधेयक समाज में पारदर्शिता लाएगा और किसी भी व्यक्ति को डरा-धमकाकर या लालच देकर धर्म परिवर्तन कराने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करेगा।

कांग्रेस का पलटवार: “विभाजनकारी एजेंडा”

Chhattisgarh विपक्षी दल कांग्रेस ने बीजेपी के इन आरोपों और पोस्टर अभियान पर कड़ा ऐतराज जताया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि बीजेपी के पास विकास के मुद्दों पर बोलने के लिए कुछ नहीं है, इसलिए वह जनता का ध्यान भटकाने के लिए धर्म और नफरत का सहारा ले रही है।

कांग्रेस का आरोप है कि ‘धर्मांतरण गैंग’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल समाज को दो हिस्सों में बांटने और आपसी भाईचारे को खत्म करने की साजिश है। पार्टी के अनुसार, इस तरह के कानून और विज्ञापनों का उद्देश्य केवल आगामी चुनावों के लिए अपनी जमीन तैयार करना है, न कि वास्तव में समाज का कल्याण करना।

सियासी समीकरण और सामाजिक प्रभाव

Chhattisgarh राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि साल 2026 का यह विधेयक केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक हथियार बन गया है। छत्तीसगढ़ के बस्तर और सरगुजा जैसे आदिवासी बहुल इलाकों में धर्मांतरण हमेशा से एक संवेदनशील मुद्दा रहा है।

बीजेपी इस मुद्दे के जरिए अपने कोर वोटर को एकजुट करने की कोशिश में है, जबकि कांग्रेस इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर प्रहार बताकर घेराबंदी कर रही है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि विधानसभा में इस विधेयक पर चर्चा के दौरान क्या रुख रहता है और जनता इस ‘पोस्टर वॉर’ को किस तरह लेती है। फिलहाल, छत्तीसगढ़ की फिजाओं में विकास से ज्यादा धर्मांतरण के कानून की गूँज सुनाई दे रही है।

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