by-Ravindra Sikarwar
आज दिल्ली उच्च न्यायालय परिसर में एक बम की धमकी मिलने के बाद अफरा-तफरी मच गई, जिससे तत्काल परिसर को खाली कराना पड़ा। हालाँकि, पुलिस और बम निरोधक दस्ते की गहन तलाशी के बाद इस धमकी को एक अफवाह घोषित किया गया।
घटना का विवरण:
यह घटना दोपहर के समय तब हुई जब दिल्ली उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल के कार्यालय को एक अज्ञात ईमेल प्राप्त हुआ। ईमेल में दावा किया गया था कि अदालत परिसर में बम रखा गया है। धमकी मिलते ही, सुरक्षा एजेंसियों ने तुरंत कार्रवाई की। दिल्ली पुलिस को इसकी सूचना दी गई, और उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) की टीमों और बम निरोधक दस्ते के साथ मिलकर पूरे परिसर की तलाशी शुरू की।
न्यायाधीशों, वकीलों, कर्मचारियों और अन्य आगंतुकों को तुरंत और सुरक्षित रूप से परिसर से बाहर निकाला गया। इस दौरान अदालत का कामकाज पूरी तरह से रोक दिया गया था।
बम निरोधक दस्ते की कार्रवाई:
बम निरोधक दस्ते ने परिसर के हर हिस्से, पार्किंग स्थल और आस-पास के क्षेत्रों की बारीकी से जाँच की। कुत्तों का दस्ता भी तलाशी में शामिल था। घंटों चली सघन जाँच के बाद, सुरक्षा एजेंसियों को कोई भी संदिग्ध वस्तु या विस्फोटक नहीं मिला। इसके बाद, शाम को लगभग 4:30 बजे, पुलिस ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की कि यह धमकी एक अफवाह (hoax) थी।
इस घटना के बाद, पुलिस ने धमकी भरा ईमेल भेजने वाले व्यक्ति की तलाश शुरू कर दी है। इस तरह की घटनाएँ अक्सर सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती पेश करती हैं और सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा उपायों की समीक्षा करने की आवश्यकता पर जोर देती हैं।
सुरक्षा का महत्व:
यह घटना एक बार फिर सार्वजनिक और संवेदनशील इमारतों में सुरक्षा प्रणालियों की प्रभावशीलता पर सवाल उठाती है। अधिकारियों का कहना है कि वे भविष्य में ऐसी अफवाहों और खतरों से निपटने के लिए प्रोटोकॉल की समीक्षा करेंगे। हालाँकि, इस त्वरित और समन्वित प्रतिक्रिया के लिए सुरक्षा बलों की सराहना की जा रही है, जिससे किसी भी संभावित खतरे को टाला जा सका।
