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Report by: Sanjeev Kumar

Bokaro : झारखंड के बोकारो जिले में न्याय की गुहार लगाते हुए एक पीड़ित परिवार का गुस्सा आज फूट पड़ा। चास मुफस्सिल थाना क्षेत्र के पुपुनकी गांव में हुई रानी बीबी की संदेहास्पद मौत के मामले में आज परिजनों और सैकड़ों ग्रामीणों ने पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय का घेराव किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस प्रशासन इस जघन्य कांड के नामजद आरोपियों को बचाने का प्रयास कर रहा है। हंगामे को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात किया गया था, जिन्होंने प्रदर्शनकारियों को कार्यालय के मुख्य द्वार पर ही रोक दिया, जिससे काफी देर तक वहां अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।

Bokaro दहेज की बलि चढ़ी खुशियां: मात्र एक साल में उजड़ा सुहाग

घटना की पृष्ठभूमि बेहद दुखद है। मृतका के परिजनों ने जानकारी दी कि रानी बीबी का निकाह फरवरी 2025 में पुपुनकी निवासी अख्तर राजा के साथ हुआ था। परिजनों ने अपनी सामर्थ्य से बढ़कर शादी में ₹2,00,000 नकद और अन्य कीमती सामान दहेज के रूप में दिए थे। उन्हें उम्मीद थी कि उनकी बेटी एक खुशहाल वैवाहिक जीवन जिएगी, लेकिन शादी के कुछ ही हफ्तों बाद ससुराल वालों का असली चेहरा सामने आ गया। परिजनों का आरोप है कि ससुराल पक्ष द्वारा लगातार ₹3,00,000 की अतिरिक्त मांग की जा रही थी, जिसे पूरा न कर पाने के कारण रानी को शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा।

Bokaro 3 अप्रैल की काली रात और संदेहास्पद मौत

परिजनों के अनुसार, दहेज की बढ़ती मांग और प्रताड़ना का अंत 3 अप्रैल की रात को हुआ, जब रानी बीबी की संदेहास्पद परिस्थितियों में मौत हो गई। मायके वालों का दावा है कि यह आत्महत्या नहीं बल्कि सुनियोजित हत्या है। उन्होंने पति अख्तर राजा, ससुर और परिवार के अन्य सदस्यों के विरुद्ध दहेज हत्या की प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई थी। परिजनों का कहना है कि रानी ने कई बार फोन पर अपनी जान को खतरा बताया था, लेकिन इससे पहले कि वे कुछ कर पाते, उसकी जीवनलीला समाप्त कर दी गई।

Bokaro “हमने पुलिस को सौंपे आरोपी, प्रशासन ने दिखाई ढिलाई”

एसपी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे लोगों का सबसे बड़ा आक्रोश पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर था। परिजनों ने मीडिया के सामने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, “हमने स्वयं सक्रियता दिखाते हुए सभी आरोपियों को पकड़कर पुलिस के हवाले किया था। हमें उम्मीद थी कि कानून सभी को सजा देगा, लेकिन पुलिस ने केवल दामाद अख्तर राजा को जेल भेजा और बाकी नामजद आरोपियों को पूछताछ के बाद छोड़ दिया।” ग्रामीणों का तर्क है कि जब हत्या की साजिश में पूरा परिवार शामिल था, तो केवल एक व्यक्ति पर कार्रवाई करना न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है।

Bokaro पुलिस का पक्ष: “कानून सम्मत हो रही है कार्रवाई”

इस पूरे मामले और हंगामे पर चास मुफस्सिल थाना प्रभारी प्रकाश मंडल ने विभाग का पक्ष रखा है। उन्होंने बताया कि पुलिस पर लगाए जा रहे आरोप बेबुनियाद हैं। थाना प्रभारी के अनुसार, मामले के मुख्य आरोपी (पति) को गिरफ्तार कर पहले ही न्यायिक हिरासत में जेल भेजा जा चुका है। अन्य नामजद आरोपियों के विरुद्ध साक्ष्य संकलन का कार्य जारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि “पुलिस पूरी तरह से कानून के दायरे में रहकर काम कर रही है और अनुसंधान (Investigation) अभी बंद नहीं हुआ है। जैसे-जैसे पुख्ता सबूत मिलेंगे, अन्य दोषियों के खिलाफ भी सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे।”

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