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नगर के राजपल्ली स्थित हनुमान मंदिर प्रांगण में हिंदू सम्मेलन समारोह समिति (अंबेडकर बस्ती) के तत्वावधान में भव्य ‘विराट हिंदू सम्मेलन’ का आयोजन किया गया। इस आध्यात्मिक और सामाजिक समागम में चित्रकूटधाम के सुप्रसिद्ध संत स्वामी सीतारामशरण जी महाराज ने मुख्य वक्ता के रूप में शिरकत की।


एकता और संगठन: समय की मांग

अपने ओजस्वी संबोधन में स्वामी जी ने कहा कि समाज की मजबूती उसकी एकता में निहित है। उन्होंने वर्तमान चुनौतियों का उल्लेख करते हुए समाज के सभी वर्गों, संतों और विभिन्न संगठनों से आह्वान किया कि वे आपसी मतभेद भुलाकर एक मंच पर आएं।

“सांस्कृतिक और सामाजिक मूल्यों को सुरक्षित रखने के लिए संगठन ही एकमात्र शक्ति है।” — स्वामी सीतारामशरण जी महाराज


भेदभाव मुक्त समाज का संकल्प

सम्मेलन का मुख्य केंद्र सामाजिक समरसता रहा। स्वामी जी ने कड़े शब्दों में समाज में व्याप्त ऊंच-नीच, जातिगत भेदभाव और छुआछूत को खत्म करने की अपील की। उन्होंने जोर दिया कि जब तक समाज एकजुट और भेदभाव मुक्त नहीं होगा, तब तक सर्वांगीण विकास संभव नहीं है।


सेवा, संस्कार और पर्यावरण संरक्षण

कार्यक्रम में केवल आध्यात्मिक चर्चा ही नहीं हुई, बल्कि व्यावहारिक जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर भी मार्गदर्शन दिया गया:

  • नैतिक शिक्षा: बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ नैतिक मूल्यों और सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने की आवश्यकता बताई गई।
  • पर्यावरण रक्षा: प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करते हुए स्वामी जी ने प्रत्येक व्यक्ति से कम से कम एक पौधा लगाने का आग्रह किया।
  • स्वदेशी अपनाओ: समाज की आर्थिक उन्नति के लिए स्थानीय और स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग पर बल दिया गया।
  • सेवा कार्य: समाज के वंचित वर्गों की सेवा को ही धर्म का वास्तविक स्वरूप बताया गया।

गणमान्य जनों की उपस्थिति

इस विराट सम्मेलन में भारी संख्या में श्रद्धालुओं और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और सामूहिक रूप से एकता का संकल्प लिया। कार्यक्रम को सफल बनाने में आयोजन समिति के संरक्षक राजा नित्यगोपाल सिंह, संयोजक सुशील हरि सहित कई स्थानीय गणमान्य लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।