By: Ravindra Sikarwar
भिंड जिले में पुलिस विभाग की साख पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। सुरपुरा थाना क्षेत्र में तैनात एक आरक्षक को रिश्वतखोरी के आरोप में दोषी ठहराते हुए विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) पंकज चतुर्वेदी की अदालत ने शुक्रवार को कड़ी सजा सुनाई। अदालत ने आरोपी आरक्षक को चार वर्ष का सश्रम कारावास और चार हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। अगर जुर्माना अदा नहीं किया गया तो अतिरिक्त छह माह की कैद भुगतनी पड़ेगी।
यह पूरा मामला वर्ष 2018 का है जब आरोपी आरक्षक रामनरेश सिंह तोमर सुरपुरा थाने में पदस्थ थे। शिकायतकर्ता का एक रिश्तेदार स्थायी गिरफ्तारी वारंट का आरोपी था और पुलिस उसकी तलाश कर रही थी। इसी दौरान आरक्षक तोमर ने शिकायतकर्ता से संपर्क किया और मदद का लालच दिया। उसने कहा कि वह वारंट तामील होने से रोक सकता है और इसके बदले उसने दस हजार रुपये की मांग की।
शिकायतकर्ता ने यह बात लोकायुक्त पुलिस को बताई। लोकायुक्त टीम ने ट्रैप प्लान तैयार किया। तय तारीख को जब आरक्षक ने पहले पांच हजार रुपये बतौर अग्रिम राशि ली, तो लोकायुक्त के हाथों रंगे हाथों पकड़ा गया। सर्च के दौरान उसके पास से रिश्वत की राशि बरामद हुई और केमिकल टेस्ट में उसके हाथ भी पॉजिटिव पाए गए। इसके बाद बाकी की राशि लेने की फिराक में था कि ट्रैप सफल हो गया।
मामला दर्ज होने के बाद लंबी सुनवाई चली। लोकायुक्त पुलिस ने मजबूत सबूत पेश किए। गवाहों के बयान, ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग, केमिकल रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजी साक्ष्य अदालत के सामने रखे गए। बचाव पक्ष की ओर से कोई ठोस दलील नहीं दी जा सकी। अंततः विशेष न्यायाधीश पंकज चतुर्वेदी ने सभी सबूतों और गवाहों पर विचार करने के बाद आरोपी को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं में दोषी पाया।
सजा सुनाते वक्त अदालत ने टिप्पणी की कि पुलिस विभाग का कोई भी सदस्य अगर जनता से इस तरह की रिश्वत लेगा तो यह न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि आम लोगों का पुलिस पर से विश्वास भी उठता है। न्यायाधीश ने कहा कि ऐसे मामलों में सख्ती बरतना जरूरी है ताकि दूसरों को सबक मिले।
आरोपी आरक्षक अभी तक निलंबित चल रहा था। अब सजा होने के बाद विभागीय कार्रवाई भी तेज होगी और संभवतः उसे सेवा से बर्खास्त कर दिया जाएगा। भिंड जिले में पिछले कुछ वर्षों में पुलिसकर्मियों के खिलाफ रिश्वतखोरी के कई मामले सामने आ चुके हैं, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
लोकायुक्त पुलिस के एसपी रमेश्वर यादव ने बताया कि उनकी टीम लगातार भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान चला रही है और आम नागरिक अगर किसी भी सरकारी कर्मचारी या अधिकारी द्वारा रिश्वत मांगे जाने की शिकायत करें तो बिना डरे आगे आएं। उन्होंने कहा कि ट्रैप के दौरान पूरी पारदर्शिता बरती जाती है और हर मामले में पुख्ता सबूत जुटाए जाते हैं।
इस फैसले से जिले के लोगों में संतोष है। कई लोगों का कहना है कि पुलिस वालों को अब समझ में आना चाहिए कि कानून से ऊपर कोई नहीं है। दूसरी ओर, पुलिस महकमे में यह सजा चर्चा का विषय बनी हुई है। कई पुलिसकर्मी इसे चेतावनी के रूप में देख रहे हैं।
कुल मिलाकर भिंड की यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति ही एकमात्र रास्ता है। अदालत का यह फैसला न सिर्फ आरोपी आरक्षक के लिए, बल्कि पूरे पुलिस बल के लिए एक कड़ा संदेश है कि जनता की सेवा करना उनका कर्तव्य है, न कि उसका व्यापार करना।
