By: Yogendra Singh
Bharatiya Janata Party : मध्य प्रदेश में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी आने वाले समय में अपने संगठन को और अधिक मजबूत करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाने जा रही है। अगले करीब दो महीनों के भीतर संगठनात्मक स्तर पर कई महत्वपूर्ण फैसले लिए जाने की तैयारी है। इनमें प्रदेश समितियों के गठन से लेकर मोर्चों की कार्यकारिणी, मंडल और बूथ स्तर तक संगठन के पुनर्गठन की प्रक्रिया शामिल है। चुनावी गतिविधियां फिलहाल न होने के कारण पार्टी का पूरा फोकस संगठन विस्तार और मजबूती पर केंद्रित है।
प्रदेश और मोर्चा स्तर पर संगठन विस्तार
Bharatiya Janata Party प्रदेश भाजपा कार्यकारिणी की घोषणा के बाद संगठनात्मक नियुक्तियों का सिलसिला लगातार आगे बढ़ रहा है। इसी क्रम में मोर्चा अध्यक्षों की नियुक्ति, संभाग और जिला प्रभारियों की जिम्मेदारी तय की जा चुकी है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल अल्पसंख्यक मोर्चा को छोड़कर लगभग सभी प्रमुख मोर्चों—महिला मोर्चा, युवा मोर्चा, किसान मोर्चा, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति मोर्चा—के अध्यक्ष नियुक्त कर चुके हैं। अब इन सभी मोर्चों की प्रदेश कार्यकारिणी की घोषणा इसी महीने होने की संभावना जताई जा रही है। इसे लेकर हाल ही में प्रदेश कार्यालय में वरिष्ठ पदाधिकारियों की बैठक भी आयोजित की गई थी।
मार्च तक जिले, मंडल और बूथ स्तर पर नई समितियां
Bharatiya Janata Party पार्टी नेताओं के अनुसार, भाजपा संगठन के अधिकांश जिलों में जिला कार्यकारिणी का गठन पूरा हो चुका है। जो जिले अभी शेष हैं, वहां भी जल्द ही कार्यकारिणी घोषित कर दी जाएगी। इसके साथ ही मंडल स्तर की कार्यकारिणी भी मार्च माह तक गठित करने का लक्ष्य रखा गया है। संगठन का अगला फोकस बूथ स्तर तक ढांचे को मजबूत करना है, ताकि जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जा सके। प्रदेश स्तर पर कुछ शेष संगठनात्मक जिम्मेदारियां तय होते ही पूरी प्रक्रिया और तेज होने की संभावना है।
निगम-मंडलों की नियुक्तियों पर अलग नीति
Bharatiya Janata Party भाजपा के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि निगम, मंडल, प्राधिकरण और अन्य सरकारी उपक्रमों में नियुक्तियों का निर्णय मुख्यमंत्री के अधिकार क्षेत्र में आता है। संगठनात्मक पदों पर कार्यरत नेताओं को सामान्यतः इन संस्थानों में नियुक्त नहीं किया जाएगा। केवल विशेष परिस्थितियों में ही कुछ अपवाद संभव होंगे। अधिकांश नियुक्तियां ऐसे नेताओं और कार्यकर्ताओं को मिलने की संभावना है, जो संगठन में पदाधिकारी नहीं हैं। इस विषय पर प्रदेश कार्यकारिणी के गठन के समय ही शीर्ष स्तर पर मंथन हो चुका था। अब एक बार फिर इस पर विचार-विमर्श जारी है और जल्द ही इस संबंध में भी अंतिम फैसला होने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर, भाजपा संगठनात्मक ढांचे को नई ऊर्जा देने और भविष्य की राजनीतिक रणनीति को मजबूत आधार देने की दिशा में निर्णायक कदम उठाने जा रही है।
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