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By: Ravindra Sikarwar

Bangladesh news: बांग्लादेश में 12 फरवरी 2026 को होने वाले आम चुनावों की तैयारी जोरों पर है, लेकिन अल्पसंख्यक समुदाय के प्रतिनिधित्व को लेकर नई चिंताएं सामने आई हैं। गोपालगंज-3 निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल करने वाले प्रमुख हिंदू नेता और वकील गोविंद चंद्र प्रमाणिक का पर्चा रिटर्निंग अधिकारी ने खारिज कर दिया है। यह सीट पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का गढ़ रही है, जहां हिंदू मतदाताओं की संख्या 50 प्रतिशत से अधिक है। इस फैसले ने अल्पसंख्यकों के राजनीतिक अधिकारों और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं।

नामांकन खारिज होने के कारण और आरोप

गोविंद चंद्र प्रमाणिक ने 28 दिसंबर 2025 को अपना नामांकन दाखिल किया था। चुनावी नियमों के अनुसार, निर्दलीय उम्मीदवारों को अपने क्षेत्र के कम से कम 1 प्रतिशत मतदाताओं के हस्ताक्षर जमा करने होते हैं। प्रमाणिक का दावा है कि उन्होंने यह शर्त पूरी की थी, लेकिन जांच के दौरान कई मतदाताओं ने अपने हस्ताक्षर से इनकार कर दिया।

प्रमाणिक ने आरोप लगाया कि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के कार्यकर्ताओं ने समर्थकों पर दबाव डाला और धमकियां दीं, जिससे हस्ताक्षर अमान्य घोषित हो गए। उन्होंने इसे राजनीतिक साजिश बताया और कहा कि रिटर्निंग अधिकारी ने उनके शपथ-पत्रों को स्वीकार नहीं किया। प्रमाणिक ने चुनाव आयोग में अपील करने और जरूरत पड़ने पर अदालत जाने की घोषणा की है।

गोविंद चंद्र प्रमाणिक कौन हैं?

प्रमाणिक बांग्लादेश जातीय हिंदू महाजोत (बीजेएचएम) के महासचिव हैं। यह संगठन 23 हिंदूवादी समूहों का गठजोड़ है, जो अल्पसंख्यक अधिकारों की रक्षा और हिंदू संस्कृति के प्रचार के लिए काम करता है। संगठन देशभर में 350 से ज्यादा वैदिक स्कूल चलाता है, जहां बच्चों को भगवद गीता और अन्य हिंदू ग्रंथों की शिक्षा दी जाती है।

प्रमाणिक पेशे से वरिष्ठ वकील हैं और पहले कभी सक्रिय पार्टी राजनीति में नहीं रहे। उन्होंने निर्दलीय लड़ने का फैसला इसलिए लिया क्योंकि उन्हें क्षेत्र में मजबूत समर्थन की उम्मीद थी। गोपालगंज-3 में करीब 3 लाख मतदाताओं में से आधे से ज्यादा हिंदू हैं, जो इस सीट को अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व के लिए महत्वपूर्ण बनाता है।

व्यापक संदर्भ: अल्पसंख्यकों की स्थिति

शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर हमलों की घटनाएं बढ़ी हैं। अंतरिम सरकार के तहत अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर आलोचना हो रही है। इस नामांकन रद्द होने की घटना को कुछ पर्यवेक्षक संस्थागत पक्षपात से जोड़ रहे हैं, जो निर्दलीय और अल्पसंख्यक समर्थित उम्मीदवारों को कमजोर करने का प्रयास हो सकता है।

पड़ोसी गोपालगंज-2 सीट से एक अन्य हिंदू निर्दलीय उम्मीदवार उत्पल बिस्वास का नामांकन वैध है, जो क्षेत्र में विविधता दिखाता है। फिर भी, प्रमाणिक का मामला हिंदू समुदाय के लिए प्रतीकात्मक हो गया है, जो चुनाव में अपनी आवाज मजबूत करना चाहता है।

यह घटना बांग्लादेश की चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और अल्पसंख्यक भागीदारी के मुद्दों को उजागर करती है। आने वाले दिनों में अपील का फैसला इस दिशा में महत्वपूर्ण होगा।

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