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By: Ravindra Sikarwar

Delhi news: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में छात्रों द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ कथित आपत्तिजनक नारे लगाने की घटना ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसे गंभीरता से लेते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और दोषी छात्रों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी है।

घटना की पृष्ठभूमि

5 जनवरी 2026 की रात को जेएनयू कैंपस में “ए नाइट ऑफ रेसिस्टेंस विद गोरिल्ला ढाबा” नामक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। यह आयोजन 2020 में हुई कैंपस हिंसा की छठी बरसी मनाने और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरोध में था। कोर्ट ने उसी दिन पूर्व जेएनयू छात्र उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। कार्यक्रम में शामिल लगभग 30-35 छात्रों ने कथित तौर पर मोदी और शाह के खिलाफ भड़काऊ नारे लगाए, जिनमें “मोदी-शाह की कबर खुदेगी, जेएनयू की धरती पर” जैसे वाक्य शामिल थे।

विश्वविद्यालय प्रशासन का कड़ा रुख

जेएनयू प्रशासन ने इन नारों को “अत्यधिक आपत्तिजनक, भड़काऊ और उत्तेजक” करार दिया। प्रशासन का कहना है कि ये नारे सुप्रीम कोर्ट की अवमानना हैं, विश्वविद्यालय के आचार संहिता का उल्लंघन करते हैं और कैंपस में शांति व सुरक्षा को खतरे में डालते हैं। दिल्ली पुलिस को लिखे पत्र में एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है। साथ ही, दोषी पाए जाने वाले छात्रों को तत्काल निलंबन, निष्कासन या स्थायी रूप से विश्वविद्यालय से निष्कासित करने जैसी सजा दी जा सकती है। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय नवाचार और नए विचारों का केंद्र हैं, न कि नफरत की प्रयोगशाला।

छात्र संघ का पक्ष

जेएनयू छात्र संघ (जेएनयूएसयू) की अध्यक्ष अदिति मिश्रा ने कहा कि कार्यक्रम शांतिपूर्ण था और नारे वैचारिक थे, जो किसी व्यक्ति पर व्यक्तिगत हमला नहीं थे। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक विरोध का हिस्सा बताया और 2020 की हिंसा की याद में आयोजित किया गया था। हालांकि, उन्होंने नारों को आपत्तिजनक मानने से इनकार नहीं किया।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने जेएनयू को “टुकड़े-टुकड़े गैंग का अड्डा” बताया और राहुल गांधी सहित विपक्षी दलों पर निशाना साधा। अन्य नेताओं ने इसे “देशद्रोही मानसिकता” करार दिया। वहीं, कुछ विपक्षी नेताओं ने विरोध के अधिकार की बात कही, लेकिन नारों की भाषा पर सवाल उठाए।

आगे की संभावना

प्रशासन ने आंतरिक जांच शुरू कर दी है और पुलिस जांच में सहयोग का आश्वासन दिया है। यह घटना जेएनयू के इतिहास में पुराने विवादों को फिर से जीवंत कर रही है, जहां अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कैंपस अनुशासन के बीच टकराव आम रहा है। आने वाले दिनों में छात्रों पर कार्रवाई से कैंपस में तनाव बढ़ सकता है।