Ambikapur : छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग मुख्यालय, अंबिकापुर में नशे के काले कारोबार के खिलाफ आबकारी विभाग ने एक निर्णायक सफलता हासिल की है। शहर के दर्रीपारा क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय नशीली दवाओं के नेटवर्क को ध्वस्त करते हुए विभाग ने कुख्यात महिला तस्कर शोभा कुशवाहा उर्फ ‘गुड़िया’ को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई ने शहर में जड़ें जमा चुके ड्रग माफियाओं के बीच हड़कंप मचा दिया है।
मुखबिर की सटीक सूचना और घेराबंदी: भागने की कोशिश नाकाम
Ambikapur आबकारी विभाग को लंबे समय से दर्रीपारा इलाके में प्रतिबंधित नशीले इंजेक्शनों की बिक्री की शिकायतें मिल रही थीं। सहायक जिला आबकारी अधिकारी रंजीत गुप्ता को पुख्ता जानकारी मिली कि शोभा कुशवाहा के आवास पर बड़ी खेप पहुँचाई गई है।
सूचना मिलते ही आबकारी उड़नदस्ता टीम ने योजनाबद्ध तरीके से दबिश दी। छापेमारी के दौरान आरोपी महिला ने नशीली दवाओं से भरा झोला लेकर भागने का प्रयास किया, लेकिन महिला आरक्षकों की मुस्तैदी के कारण उसे मौके पर ही दबोच लिया गया। तलाशी लेने पर पुलिस को उसके पास से 106 नग रेक्सोजेसिक (Rexogesic) और 72 नग एविल (Avil) के प्रतिबंधित इंजेक्शन बरामद हुए, जिनका उपयोग नशे के लिए किया जा रहा था।
पूछताछ में खुला राज: सप्लाई चेन के दो अन्य गुर्गे भी सलाखों के पीछे
Ambikapur गिरफ्तारी के बाद जब कड़ाई से पूछताछ की गई, तो ‘गुड़िया’ ने अपने पूरे नेटवर्क का कच्चा चिट्ठा खोल दिया। उसने स्वीकार किया कि वह केवल एक मोहरा थी और उसे नशीले पदार्थों की यह खेप दर्रीपारा के ही निवासी मनु श्रीवास्तव और सुंदरलाल कुर्रे द्वारा उपलब्ध कराई गई थी।
आबकारी टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इन दोनों सप्लायरों को भी गिरफ्तार कर लिया। विभाग ने तीनों आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर उन्हें विशेष न्यायाधीश (नारकोटिक्स) अंबिकापुर की अदालत में पेश किया, जहाँ से उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन गिरफ्तारियों से अंबिकापुर में नशीले इंजेक्शनों की आपूर्ति श्रृंखला (supply chain) को बड़ा झटका लगा है।
‘गुड़िया’ का पुराना आपराधिक इतिहास: दो दशकों से नशे का साम्राज्य
Ambikapur शोभा कुशवाहा उर्फ गुड़िया अंबिकापुर पुलिस और आबकारी विभाग के लिए कोई नया नाम नहीं है। बताया जाता है कि वह पिछले 15 से 20 वर्षों से अवैध नशीले पदार्थों के कारोबार में संलिप्त रही है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, शुरुआत में वह ‘ब्राउन शुगर’ की तस्करी करती थी, लेकिन पुलिस की सख्ती के बाद उसने नशीले इंजेक्शनों का धंधा शुरू कर दिया।
हैरानी की बात यह है कि पिछले कई वर्षों में उस पर कई बार छापेमारी हुई, लेकिन शातिर अपराधी होने के कारण वह हर बार कानून की गिरफ्त से बचने में सफल रही। इस बार आबकारी विभाग की पुख्ता तैयारी और महिला सैनिकों की तत्परता ने उसके इस ‘नशे के साम्राज्य’ पर पूर्ण विराम लगा दिया है।
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