Report by: Yogendra Singh
Ambikapur : छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले से एक बड़ी खबर सामने आई है। अंबिकापुर स्थित संजय पार्क में आवारा कुत्तों के जानलेवा हमले में 15 हिरणों की दर्दनाक मौत के बाद वन विभाग ने एक बड़ा फैसला लिया है। विभाग ने अब पार्क में सुरक्षित बचे हुए 16 हिरणों सहित अन्य सभी वन्य प्राणियों को उनके प्राकृतिक आवास यानी अभयारण्य में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
नियमों की अनदेखी: बिना अनुमति के रखे गए थे 31 हिरण
Ambikapur इस दुखद घटना के बाद हुई प्रारंभिक जांच में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। पता चला है कि सेंट्रल जू अथॉरिटी (CZA) की अनिवार्य अनुमति के बिना ही संजय पार्क में कुल 31 हिरणों को रखा गया था। नियमों के मुताबिक, किसी भी स्थान पर वन्यजीवों को स्थायी रूप से रखने के लिए केंद्रीय प्राधिकरण की अनुमति आवश्यक होती है। 15 हिरणों की मौत के बाद हुए इस खुलासे ने वन विभाग की कार्यप्रणाली और सुरक्षा इंतज़ामों पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।
रेस्क्यू सेंटर या चिड़ियाघर? डीएफओ ने किया स्पष्ट
Ambikapur सरगुजा के डीएफओ (DFO) ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि संजय पार्क मूल रूप से कोई चिड़ियाघर (Zoo) नहीं है, बल्कि यह एक वन्यप्राणी रेस्क्यू सेंटर (Wildlife Rescue Center) है। रेस्क्यू सेंटर का मुख्य उद्देश्य घायल या संकट में फंसे वन्यजीवों को लाकर उनका प्राथमिक उपचार करना और स्वस्थ होने पर उन्हें वापस जंगल या अभयारण्य में छोड़ना होता है। हालांकि, लंबे समय तक इतनी बड़ी संख्या में हिरणों का यहाँ रहना प्रबंधन की बड़ी चूक मानी जा रही है।
सुरक्षित भविष्य की ओर कदम: प्राकृतिक आवास में वापसी
Ambikapur आवारा कुत्तों के हमले ने पार्क की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। अब भविष्य में ऐसी किसी भी अनहोनी को रोकने के लिए विभाग ने निर्णय लिया है कि यहाँ मौजूद सभी 16 हिरणों को जल्द से जल्द किसी सुरक्षित अभयारण्य (Sanctuary) में शिफ्ट किया जाएगा। इससे न केवल इन बेजुबानों को प्राकृतिक और सुरक्षित वातावरण मिलेगा, बल्कि कुत्तों जैसे बाहरी खतरों से भी उन्हें निजात मिल सकेगी।
वन विभाग की टीम अब स्थानांतरण के लिए आवश्यक कागजी कार्रवाई और लॉजिस्टिक्स जुटाने में लगी है, ताकि बचे हुए वन्यजीवों को बिना किसी तनाव के उनके नए घर तक पहुँचाया जा सके।
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