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Report by: Yogendra Singh

Amarwara : मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के अंतर्गत आने वाले अमरवाड़ा विधानसभा क्षेत्र में कुदरत का कहर बरपा है। हाल ही में हुई भीषण ओलावृष्टि और तेज आंधी ने क्षेत्र के अन्नदाताओं की कमर तोड़ दी है। विशेष रूप से ग्राम साजवा और उसके समीपवर्ती इलाकों में खेतों में खड़ी लहलहाती फसलें अब मलबे में तब्दील हो चुकी हैं। इस संकट की घड़ी में न्याय और आर्थिक सहायता की उम्मीद लिए बड़ी संख्या में किसान छिंदवाड़ा कलेक्ट्रेट पहुंचे और जिला प्रशासन को अपनी आपबीती सुनाई।

खेतों में बिछीं फसलें: गेहूं, चना और सरसों को भारी नुकसान

Amarwara के किसानों के लिए यह ओलावृष्टि किसी त्रासदी से कम नहीं है। खेतों में पककर तैयार खड़ी गेहूं, चना और सरसों की फसलें ओलों की मार और तेज हवाओं के कारण पूरी तरह जमीन पर बिछ गई हैं।

किसानों ने रुआंसे स्वर में बताया कि उन्होंने कर्ज लेकर और कड़ाके की ठंड में रात-दिन एक करके इन फसलों को सींचा था। अब जब कटाई का समय नजदीक था, तब प्रकृति के इस प्रहार ने उनकी सारी मेहनत पर पानी फेर दिया है। ओलावृष्टि के कारण दानों के झड़ने और पौधों के टूटने से पैदावार लगभग शून्य होने की कगार पर है, जिससे किसानों के सामने गहरा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

प्रशासन से मांग: निष्पक्ष सर्वे और पारदर्शी मूल्यांकन

Amarwara कलेक्ट्रेट परिसर में एकजुट हुए किसानों ने जिला प्रशासन को एक औपचारिक ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारी किसानों की प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:

  • संयुक्त टीम का गठन: राजस्व और कृषि विभाग की संयुक्त टीमें तुरंत प्रभावित गांवों का दौरा करें।
  • पारदर्शी सर्वे: सर्वे की प्रक्रिया केवल कागजों तक सीमित न रहकर जमीनी हकीकत पर आधारित हो, ताकि नुकसान का सटीक आकलन हो सके।
  • समावेशी प्रक्रिया: यह सुनिश्चित किया जाए कि सर्वे के दौरान कोई भी पात्र किसान, चाहे वह छोटा हो या बड़ा, इस प्रक्रिया से वंचित न रह जाए।

किसानों का कहना है कि अक्सर सर्वे में देरी या त्रुटियों के कारण वास्तविक पीड़ितों को लाभ नहीं मिल पाता, इसलिए इस बार प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बरती जानी चाहिए।

त्वरित राहत की अपील: अगली फसल पर मंडराया संकट

Amarwara ज्ञापन के माध्यम से किसानों ने शासन-प्रशासन से आपदा राहत नियमों के तहत त्वरित आर्थिक सहायता की अपील की है। किसानों का तर्क है कि यदि उन्हें समय पर मुआवजा नहीं मिला, तो उनके लिए न केवल परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल होगा, बल्कि अगली फसल की बुवाई के लिए बीज और खाद जुटाना भी असंभव हो जाएगा।

अमरवाड़ा के इन प्रभावित गांवों के ग्रामीण अब टकटकी लगाए प्रशासन की ओर देख रहे हैं। अब गेंद प्रशासन के पाले में है कि वह कितनी तत्परता से सर्वे कार्य पूर्ण कर अन्नदाताओं के जख्मों पर मरहम लगाता है।

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