By: Ravindra Sikarwar
Bhopal news: नया साल 2026 मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए उम्मीद की नई किरण लेकर आया है। भोपाल स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) इस वर्ष अपनी चिकित्सा सेवाओं में बड़ा बदलाव लाने जा रहा है। संस्थान ने वर्ष भर का जो कार्ययोजना तैयार की है, उससे गंभीर और जटिल बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को स्थानीय स्तर पर ही विश्वस्तरीय इलाज मिल सकेगा। अब कैंसर, ब्रेन ट्यूमर या अंग प्रत्यारोपण जैसे मामलों में दिल्ली या मुंबई जैसे बड़े शहरों का चक्कर लगाने की जरूरत कम हो जाएगी। एम्स प्रबंधन का मुख्य जोर डायग्नोस्टिक सुविधाओं को मजबूत करने और क्रिटिकल केयर क्षमता बढ़ाने पर है।
गामा नाइफ और पेट स्कैन की नई सुविधाएं
इस वर्ष एम्स भोपाल में दो महत्वपूर्ण हाईटेक मशीनें स्थापित की जाएंगी – गामा नाइफ और पेट स्कैन। गामा नाइफ तकनीक मस्तिष्क संबंधी जटिल बीमारियों, खासकर ब्रेन ट्यूमर के इलाज में क्रांतिकारी साबित होगी। इस विधि से बिना सर्जरी के, केवल लक्षित रेडिएशन के माध्यम से ट्यूमर को नष्ट किया जा सकता है, जिससे मरीज को कम दर्द और तेज रिकवरी मिलती है।
दूसरी ओर, पेट स्कैन मशीन कैंसर के निदान में गेम चेंजर होगी। यह शरीर में कैंसर के फैलाव और स्टेज का सटीक पता लगाने में मदद करती है, जिससे इलाज जल्दी शुरू हो सकेगा और मरीज की जान बचाने की संभावना बढ़ेगी। इन दोनों सुविधाओं के शुरू होने से मध्य प्रदेश और आसपास के राज्यों के मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी।
ट्रांसप्लांट के लिए समर्पित ऑपरेशन थिएटर
अंग प्रत्यारोपण क्षेत्र में एम्स भोपाल पहले से ही सराहनीय कार्य कर रहा है। जनवरी 2025 में यहां मध्य प्रदेश का पहला सफल हृदय प्रत्यारोपण हुआ था, और अब तक तीन हृदय तथा 17 किडनी ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक किए जा चुके हैं। वर्ष 2026 में इस सेवाओं को और मजबूत करने के लिए एक अलग से समर्पित ऑपरेशन थिएटर शुरू किया जाएगा।
यह विशेष ओटी हृदय, लिवर और किडनी ट्रांसप्लांट के लिए डिजाइन किया जाएगा, जहां संक्रमण का खतरा न्यूनतम होगा। इससे प्रतीक्षा सूची में लगे मरीजों की संख्या कम होगी और अधिक लोगों को समय पर नया जीवन मिल सकेगा। यह कदम संस्थान की क्रिटिकल केयर क्षमता को कई गुना बढ़ा देगा।
नया आईसीयू भवन और रोबोटिक सर्जरी का विस्तार
गंभीर मरीजों की बढ़ती संख्या को ध्यान में रखते हुए कैंसर ब्लॉक के पास एक नया चार मंजिला अत्याधुनिक आईसीयू भवन बनाया जाएगा। यह भवन आधुनिक उपकरणों और सुविधाओं से सुसज्जित होगा, जिससे इमरजेंसी और क्रिटिकल केसों की बेहतर देखभाल संभव हो सकेगी।
साथ ही, सर्जरी में सटीकता और सुरक्षा बढ़ाने के लिए रोबोटिक सर्जरी सेवाओं का विस्तार किया जाएगा। नए डॉक्टरों और सर्जनों को प्रशिक्षण देने के लिए एक अलग रोबोटिक ट्रेनिंग सेंटर भी स्थापित होगा। इससे न केवल इलाज की गुणवत्ता बढ़ेगी, बल्कि भविष्य में अधिक कुशल चिकित्सक तैयार होंगे।
मरीजों के लिए सस्ता और विश्वस्तरीय इलाज
एम्स भोपाल का मुख्य लक्ष्य कम लागत पर उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराना है। संस्थान के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. केतन मेहरा ने कहा कि 2026 के लिए तैयार रोडमैप में डायग्नोस्टिक और क्रिटिकल केयर पर विशेष ध्यान दिया गया है। गामा नाइफ, पेट स्कैन और ट्रांसप्लांट ओटी जैसी सुविधाओं के साथ एम्स अब सबसे जटिल बीमारियों का इलाज स्थानीय स्तर पर ही करने में सक्षम होगा।
ये सभी विकास मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत बनाएंगे और आम लोगों को महंगे निजी अस्पतालों पर निर्भरता से मुक्ति दिलाएंगे। आने वाला वर्ष एम्स भोपाल के लिए मील का पत्थर साबित होने वाला है।
