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by Ravindra Sikarwar

अफगानिस्तान ने पाकिस्तान को नदी जल की आपूर्ति को प्रतिबंधित करने का निर्णय लिया है, जो भारत के हाल के कदमों के बाद क्षेत्रीय जल विवादों में एक नया मोड़ लाता है। काबुल नदी, जो अफगानिस्तान से निकलकर पाकिस्तान में प्रवेश करती है, अब इस नए तनाव का केंद्र बन गई है। यह नदी पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण जल स्रोत है।

अफगानिस्तान के अधिकारियों ने इस कदम को अपनी जल संसाधन नीति का हिस्सा बताया है, जिसका उद्देश्य देश के आंतरिक विकास और कृषि जरूरतों को प्राथमिकता देना है। विशेषज्ञों का मानना है कि अफगानिस्तान में बन रहे नए बांध और सिंचाई परियोजनाएं इस निर्णय के पीछे प्रमुख कारण हो सकते हैं। काबुल नदी पर प्रस्तावित शतोत बांध, जो काबुल शहर की पानी की जरूरतों को पूरा करेगा, पाकिस्तान में जल प्रवाह को प्रभावित कर सकता है।

यह कदम भारत द्वारा जम्मू-कश्मीर में सिंधु जल संधि के तहत जल परियोजनाओं को तेज करने के बाद आया है, जिससे पाकिस्तान में जल की उपलब्धता पहले ही कम हुई है। क्षेत्रीय विश्लेषकों का कहना है कि अफगानिस्तान का यह फैसला दोनों देशों के बीच पहले से तनावपूर्ण संबंधों को और जटिल कर सकता है।

पाकिस्तान ने इस कदम पर चिंता जताई है, क्योंकि काबुल नदी का जल उसकी कृषि और पेयजल आवश्यकताओं के लिए महत्वपूर्ण है। दूसरी ओर, अफगानिस्तान का तर्क है कि उसे अपने संसाधनों का उपयोग अपनी जनता के कल्याण के लिए करने का पूरा अधिकार है।

इस घटनाक्रम ने दक्षिण एशिया में जल संसाधनों के प्रबंधन और क्षेत्रीय सहयोग पर नई बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि बिना आपसी बातचीत और समझौतों के, यह विवाद क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा सकता है।

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