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by-Ravindra Sikarwar

कानपुर में एक कॉलेज कुत्तों ने एक छात्रा पर हमला कर उसे घायल कर दिया, इलाज के दौरान उसके चेहरे पर 17 टांके आये है वही दिल्ली में कुत्तों को नसबंदी के बाद छोड़ने का सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है।

कानपुर की घटना: आवारा कुत्तों का आतंक
उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक भयावह घटना सामने आई है, जहाँ एक कॉलेज छात्रा पर आवारा कुत्तों ने हमला कर दिया। इस हमले में छात्रा गंभीर रूप से घायल हो गई और उसके चेहरे पर 17 टांके लगाने पड़े। यह घटना तब हुई जब छात्रा अपनी स्कूटी से जा रही थी। कुत्तों के झुंड ने उस पर हमला कर दिया, जिससे वह स्कूटी से गिर गई। इस घटना ने एक बार फिर से शहरों में आवारा कुत्तों के बढ़ते खतरे को उजागर किया है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से इस समस्या का समाधान करने की मांग की है।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला: दिल्ली में आवारा कुत्तों को लेकर नया आदेश
एक ओर जहाँ कानपुर में आवारा कुत्तों का आतंक जारी है, वहीं दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में आवारा कुत्तों को लेकर अपने आदेश में बदलाव किया है। कोर्ट ने अब नसबंदी (sterilization) के बाद आवारा कुत्तों को उनके मूल स्थान पर वापस छोड़ने की अनुमति दे दी है। यह फैसला पशु कल्याण कार्यकर्ताओं और सरकारी एजेंसियों के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद के बाद आया है।

पृष्ठभूमि और आदेश का विवरण:
दिल्ली उच्च न्यायालय ने पहले एक आदेश जारी किया था जिसमें आवारा कुत्तों को उनके मूल स्थान से हटाकर ‘डॉग शेल्टर’ में रखने की बात कही गई थी। इस आदेश का पशु प्रेमियों और कल्याणकारी संगठनों ने विरोध किया था, उनका तर्क था कि कुत्तों को उनके प्राकृतिक आवास से हटाना उनके लिए हानिकारक है। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर संज्ञान लिया और अब अपने नए आदेश में कहा है कि नसबंदी और टीकाकरण के बाद कुत्तों को उन्हीं इलाकों में वापस छोड़ा जा सकता है जहाँ से उन्हें पकड़ा गया था। इस फैसले का उद्देश्य न केवल आवारा कुत्तों की आबादी को नियंत्रित करना है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि उन्हें अमानवीय तरीके से नहीं रखा जाए। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि आवारा कुत्तों को खाना खिलाना कानूनी है और कोई भी व्यक्ति उन्हें खाना खिलाने से रोक नहीं सकता है।

यह आदेश देश के अन्य हिस्सों में भी आवारा कुत्तों के प्रबंधन को लेकर एक मिसाल कायम कर सकता है। हालांकि, कानपुर जैसी घटनाओं को देखते हुए, यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या केवल नसबंदी से ही इस समस्या का पूर्ण समाधान हो पाएगा।