by-Ravindra Sikarwar
नोएडा: गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू) में बी.टेक तृतीय वर्ष के एक छात्र ने अपने हॉस्टल के कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। छात्र के पास से एक सुसाइड नोट मिला है, जिसमें उसने भारत की मौजूदा शिक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
घटना का विवरण:
22 वर्षीय छात्र का शव मंगलवार को उसके हॉस्टल के कमरे में पंखे से लटका मिला। उसके दोस्तों ने जब दरवाजा खटखटाया और कोई जवाब नहीं मिला, तो उन्होंने हॉस्टल वार्डन को सूचित किया। पुलिस को तुरंत मौके पर बुलाया गया, जिन्होंने दरवाजा तोड़कर शव को बरामद किया। पुलिस को कमरे से एक सुसाइड नोट भी मिला है।
सुसाइड नोट में क्या लिखा था?
सुसाइड नोट में, छात्र ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई के भारी दबाव, परीक्षाओं के तनाव और भविष्य की अनिश्चितता का जिक्र किया है। उसने लिखा है कि वर्तमान शिक्षा व्यवस्था छात्रों को रटने पर मजबूर करती है, न कि उन्हें रचनात्मक रूप से सोचने के लिए प्रोत्साहित करती है। उसने यह भी कहा कि “डिग्री की दौड़” में छात्र अपनी प्रतिभा और रुचियों को खो देते हैं। नोट में छात्र ने लिखा है कि इस प्रणाली ने उसे “अंदर से खोखला” कर दिया है और वह अब और नहीं लड़ सकता।
पुलिस और विश्वविद्यालय की प्रतिक्रिया:
पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार, प्रथम दृष्टया यह आत्महत्या का मामला लगता है, लेकिन वे सभी पहलुओं की जांच कर रहे हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि छात्र के अकादमिक रिकॉर्ड अच्छे थे और उन्हें कोई मानसिक परेशानी के संकेत नहीं मिले थे। हालांकि, इस घटना ने एक बार फिर से छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और शिक्षा प्रणाली के दबाव पर बहस छेड़ दी है।
विशेषज्ञों की राय:
मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि यह घटना एक बड़े सामाजिक मुद्दे को दर्शाती है। वे कहते हैं कि छात्रों पर सिर्फ अच्छे नंबर लाने और महंगी डिग्री हासिल करने का दबाव है, जबकि उनकी मानसिक सेहत पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता। यह घटना इस बात की याद दिलाती है कि हमारी शिक्षा प्रणाली को केवल अकादमिक उत्कृष्टता पर ही नहीं, बल्कि छात्रों के समग्र विकास और मानसिक कल्याण पर भी ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।
