by-Ravindra Sikarwar
वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफों के पुल बांधे, लेकिन जल्द ही एक विचित्र टिप्पणी कर दी जिसने सबको चौंका दिया। ट्रंप ने मोदी को “महान व्यक्ति” बताते हुए कहा कि वे “ट्रंप से प्यार करते हैं”, लेकिन तुरंत स्पष्ट किया कि इस शब्द को गलत अर्थ न लगाया जाए, क्योंकि वे “मोदी का राजनीतिक करियर नष्ट नहीं करना चाहते”। यह बयान रूस से तेल खरीद बंद करने के दावे के साथ आया, जिस पर भारत-अमेरिका संबंधों में पहले से ही तनाव है।
ट्रंप ने ओवल ऑफिस में संवाददाताओं से कहा, “मोदी एक महान व्यक्ति हैं। वे ट्रंप से प्यार करते हैं।” फिर हंसते हुए उन्होंने जोड़ा, “मैं नहीं चाहता कि आप ‘प्यार’ शब्द को किसी और तरह से लें। मैं उनका राजनीतिक करियर बर्बाद नहीं करना चाहता।” यह टिप्पणी ट्रंप की अपनी शैली में एक हल्का-फुल्का मजाक लग सकती है, लेकिन विशेषज्ञ इसे उनके अप्रत्याशित बयानों की एक और कड़ी मान रहे हैं। ट्रंप ने आगे कहा कि भारत एक अद्भुत देश है और मोदी एक परीक्षित नेतृत्व वाले लंबे समय से सत्ता में हैं। उन्होंने दावा किया कि मोदी ने उन्हें आश्वासन दिया है कि भारत रूस से तेल आयात जल्द ही बंद कर देगा, हालांकि यह प्रक्रिया तुरंत पूरी नहीं हो सकती।
ट्रंप का यह बयान उस संदर्भ में आया जब एक पत्रकार ने अमेरिकी राजदूत-नामित सर्जियो गोर और मोदी की हालिया मुलाकात के बारे में पूछा। गोर ने 11 अक्टूबर को नई दिल्ली में मोदी से भेंट की थी, जहां उन्होंने प्रधानमंत्री को व्हाइट हाउस में ट्रंप के साथ एक फोटो भेंट की, जिस पर ट्रंप ने हस्ताक्षर कर लिखा था, “प्रधानमंत्री जी, आप महान हैं”। ट्रंप ने कहा, “मुझे लगता है कि उनकी बैठक शानदार रही। मोदी एक महान व्यक्ति हैं।” यह टिप्पणी तब आई जब अमेरिका-भारत संबंधों में रूसी तेल खरीद को लेकर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ के कारण उत्पन्न तनाव थोड़ा कम हो रहा था।
ट्रंप ने रूसी तेल आयात पर जोर देते हुए कहा, “मुझे यह पसंद नहीं आया कि भारत रूस से तेल खरीद रहा था। इससे व्लादिमीर पुतिन को यूक्रेन युद्ध के लिए धन मिलता है। लेकिन मोदी ने मुझे आज आश्वस्त किया कि वे रूस से तेल नहीं खरीदेंगे। यह एक बड़ा कदम है।” उन्होंने दावा किया कि मोदी ने कहा है कि प्रक्रिया धीरे-धीरे पूरी होगी, लेकिन जल्द ही समाप्त हो जाएगी। ट्रंप ने इसे “ब्रेकिंग न्यूज” करार दिया और कहा कि अगर भारत तेल न खरीदे तो यूक्रेन में शांति स्थापित करना आसान हो जाएगा। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि युद्ध समाप्त होने के बाद भारत रूस के साथ संबंध सामान्य कर सकता है।
ट्रंप की यह टिप्पणी उनके पिछले बयानों से मेल खाती है, जहां वे मोदी को अपना “निकटतम सहयोगी” बताते रहे हैं। लेकिन रूसी तेल खरीद पर अमेरिकी दबाव के कारण संबंधों में खटास आई थी। सितंबर 2025 में भारत ने रूस से औसतन प्रतिदिन 1.62 मिलियन बैरल कच्चा तेल आयात किया, जो कुल आयात का लगभग एक तिहाई है। अमेरिका का तर्क है कि यह खरीद मॉस्को को युद्ध के लिए वित्तीय सहायता देती है। ट्रंप ने पहले भारत पर “रूसी युद्ध मशीन को फंडिंग” का आरोप लगाया था, जिसके जवाब में भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा और उपभोक्ता हितों को प्राथमिकता बताई।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने ट्रंप के दावे पर सीधा खंडन नहीं किया, लेकिन स्पष्ट किया कि ऊर्जा आयात नीतियां राष्ट्रीय हितों पर आधारित हैं। MEA प्रवक्ता रंधीर जायस्वाल ने कहा, “हम वैश्विक ऊर्जा बाजार की अस्थिरता में भारतीय उपभोक्ताओं को सस्ती और सुरक्षित आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।” उन्होंने अमेरिका से ऊर्जा सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया, लेकिन कहा कि कोई नई फोन कॉल का विवरण उपलब्ध नहीं है। विपक्षी नेता राहुल गांधी ने इसे “ट्रंप को खुश करने की कोशिश” बताते हुए सरकार पर निशाना साधा।
ट्रंप का यह बयान वैश्विक ऊर्जा भू-राजनीति के बीच आया है, जहां भारत संतुलित नीति अपनाने का प्रयास कर रहा है। पूर्व अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि ट्रंप मोदी से नोबेल शांति पुरस्कार की सार्वजनिक तारीफ की उम्मीद कर रहे थे, जो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने की। लेकिन मोदी ने ऐसा नहीं किया, जिससे ट्रंप नाराज दिखे। फिर भी, ट्रंप ने मोदी को “मेरा दोस्त” कहा और दोनों देशों के बीच मजबूत संबंधों की उम्मीद जताई।
यह घटना ट्रंप की अप्रत्याशित शैली को दर्शाती है, जो कभी तारीफ तो कभी विवादास्पद टिप्पणियों से भरी रहती है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह बयान अमेरिका-भारत साझेदारी को मजबूत करने का प्रयास हो सकता है, लेकिन रूसी तेल विवाद अनसुलझा बना हुआ है। भारत ने दोहराया कि उसकी नीतियां आर्थिक लाभ और ऊर्जा सुरक्षा पर निर्भर हैं, न कि बाहरी दबाव पर।
