by-Ravindra Sikarwar
रोहतक: हरियाणा पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार, जातिवाद और उत्पीड़न के आरोपों से जुड़े एक दुखद मामले में एक और चौंकाने वाला मोड़ आ गया है। रोहतक के साइबर सेल में तैनात सहायक उप-निरीक्षक (एएसआई) संदीप कुमार ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली, जिसमें उन्होंने हाल ही में आत्महत्या करने वाले वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी वाई. पुरण कुमार पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। संदीप ने एक तीन पृष्ठों का सुसाइड नोट और एक वीडियो संदेश छोड़ा, जिसमें उन्होंने पुरण कुमार को ‘पूर्ण रूप से भ्रष्ट’ बताया और दावा किया कि पुरण ने भ्रष्टाचार उजागर होने के डर से अपनी जान दी। यह घटना पुरण कुमार की मौत के सातवें दिन हुई, जिसने पहले ही पुलिस विभाग में हलचल मचा दी थी। संदीप की मौत ने न केवल जांच को जटिल बना दिया है, बल्कि हरियाणा पुलिस में व्याप्त कथित भ्रष्ट प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
संदीप कुमार की मौत मंगलवार दोपहर रोहतक के एक खुले खेत में हुई, जहां उन्होंने अपनी सर्विस रिवॉल्वर से खुद को गोली मार ली। स्थानीय निवासियों ने शोर सुनकर पुलिस को सूचना दी, और मौके पर पहुंची टीम ने उनका शव बरामद किया। पुलिस ने बताया कि संदीप रोहतक साइबर सेल में तैनात थे और हाल ही में पुरण कुमार के करीबी सहयोगी हेड कांस्टेबल सुषील कुमार की गिरफ्तारी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। सुषील को 6 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया था, जो पुरण कुमार के व्यक्तिगत सुरक्षा अधिकारी (पीएसओ) के रूप में काम करते थे।
घटना का पूरा विवरण:
संदीप ने मौत से पहले एक लगभग 6 मिनट 26 सेकंड का वीडियो रिकॉर्ड किया, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में उन्होंने रोहतक रेंज में पुरण कुमार के पोस्टिंग के बाद की स्थिति का वर्णन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुरण ने ईमानदार अधिकारियों को हटाकर भ्रष्ट लोगों को तरजीह दी, और तबादले जाति के आधार पर किए जाते थे। “पुरण कुमार एक भ्रष्ट अधिकारी थे। उन्होंने सिस्टम को जातिवाद के नाम पर हाईजैक कर लिया था। भ्रष्टाचार की शिकायतें उजागर होने पर वे डर गए और आत्महत्या कर ली,” संदीप ने वीडियो में कहा। उन्होंने यह भी दावा किया कि पुरण के स्टाफ अधिकारी ‘पूर्णतः भ्रष्ट’ थे, जो भ्रष्ट अधिकारियों को पोस्टिंग देकर और महिलाओं को तबादले की धमकी देकर उत्पीड़न करते थे।
तीन पृष्ठों के सुसाइड नोट में संदीप ने लिखा, “मैं सत्य के लिए अपनी जान कुर्बान कर रहा हूं। इस भ्रष्ट परिवार को बख्शा नहीं जाना चाहिए। उनकी संपत्तियों की जांच होनी चाहिए। यह जाति का मुद्दा नहीं, बल्कि सच्चाई का सवाल है।” उन्होंने रोहतक के एसपी नरेंद्र बिजरनिया की ईमानदारी की सराहना की, जो पुरण के नोट में नामित 10 अधिकारियों में से एक थे। संदीप ने यह भी कहा कि पुरण के गनमैन सुषील ने फाइलों में छोटी-मोटी गलतियां ढूंढकर अधिकारियों को ब्लैकमेल किया और पैसे ऐंठे। “व्यापारी पहले से ही गुंडों से धमकी झेल रहे होते हैं, और आप उन्हें बुलाकर प्रताड़ित करते हैं। यह कुर्सी का दुरुपयोग है,” नोट में लिखा था।
पृष्ठभूमि: वाई. पुरण कुमार की मौत
यह घटना आईपीएस अधिकारी वाई. पुरण कुमार (52 वर्ष) की आत्महत्या से जुड़ी है, जो 7 अक्टूबर को चंडीगढ़ के सेक्टर 11 स्थित उनके सरकारी आवास पर हुई। पुरण, 2001 बैच के हरियाणा कैडर अधिकारी, रोहतक के सुन्नारिया पुलिस ट्रेनिंग सेंटर में इंस्पेक्टर जनरल के पद पर तैनात थे। उन्होंने अपनी सर्विस रिवॉल्वर से सिर में गोली मार ली, जब उनकी पत्नी आईएएस अधिकारी अमनीत पुरण कुमार जापान की आधिकारिक यात्रा पर थीं। पुरण ने एक ‘फाइनल नोट’ छोड़ा, जिसमें उन्होंने 16 वरिष्ठ आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के नाम लिए और आरोप लगाया कि जातिगत भेदभाव और उत्पीड़न के कारण उन्होंने यह कदम उठाया। उन्होंने दावा किया कि सीनियर अधिकारी उन्हें जानबूझकर अपमानित कर रहे थे ताकि उनका करियर बर्बाद हो।
पुरण की मौत के बाद चंडीगढ़ पुलिस ने एक विशेष जांच टीम (एसआईटी) गठित की, और एफआईआर में एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराएं जोड़ी गईं, उनकी पत्नी की मांग पर। अमनीत ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से हस्तक्षेप की अपील की थी। पुरण के नोट ने राजनीतिक हलचल मचा दी, और विपक्ष ने इसे दलित अधिकारियों के खिलाफ सिस्टमिक भेदभाव का मामला बताया।
जांच और प्रशासनिक बदलाव:
संदीप की मौत के बाद रोहतक पुलिस ने मौके को सील कर दिया और फॉरेंसिक टीम बुलाई। एसपी सूरिंदर सिंह भोरिया ने कहा, “संदीप एक मेहनती और ईमानदार अधिकारी थे। वीडियो और नोट की जांच चल रही है। अभी कुछ कहना मुश्किल है।” संदीप रोहतक में वसूली के एक मामले की जांच कर रहे थे, जिसमें पुरण के स्टाफ का नाम आया था। उनकी मौत ने पुरण मामले की जांच को और जटिल कर दिया है।
इस घटना के तुरंत बाद हरियाणा सरकार ने कड़े कदम उठाए। राज्य के डीजीपी को छुट्टी पर भेज दिया गया, और उनकी जगह ओपी सिंह को कार्यवाहक डीजीपी बनाया गया। रोहतक के एसपी नरेंद्र बिजरनिया को हटा दिया गया, और उनकी जगह सूरिंदर सिंह भोरिया को तैनात किया गया। सरकार ने पुरण के नोट में नामित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया है। चंडीगढ़ पुलिस की एसआईटी अब दोनों मौतों की संयुक्त जांच कर रही है, जिसमें भ्रष्टाचार, जातिवाद और आत्महत्या के पीछे के कारणों पर फोकस है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं:
इस दोहरी घटना ने राजनीतिक दलों को बांट दिया। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पुरण के परिवार से मुलाकात के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से तत्काल कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा, “यह दलित परिवारों के खिलाफ सिस्टमिक भेदभाव का मामला है। पुरण को अपमानित करने की साजिश रची गई थी।” कांग्रेस ने इसे पुलिस विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार का प्रतीक बताया।
दूसरी ओर, भाजपा ने संदीप के आरोपों को गंभीरता से लिया और कहा कि सच्चाई सामने आएगी। मुख्यमंत्री सैनी ने कहा, “हम पारदर्शी जांच सुनिश्चित करेंगे। कोई दोषी बख्शा नहीं जाएगा।” विपक्ष ने सरकार पर ढिलाई का आरोप लगाया, जबकि सत्ताधारी दल ने इसे व्यक्तिगत मामला बताकर राजनीतिकरण से बचने की अपील की। महिला अधिकार संगठनों ने पुरण के स्टाफ द्वारा महिलाओं पर उत्पीड़न के आरोपों पर विशेष जांच की मांग की।
विशेषज्ञों की राय और प्रभाव:
पुलिस सुधार विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना हरियाणा पुलिस में गहरी खामियों को उजागर करती है, जहां भ्रष्टाचार और जातिवाद दोनों ही प्रमुख मुद्दे हैं। डॉ. राजेश कुमार, एक पूर्व आईपीएस अधिकारी, ने कहा, “दोनों मौतें विभागीय कल्चर की नाकामी दर्शाती हैं। ईमानदार अधिकारियों को संरक्षण देने की जरूरत है।” सोशल मीडिया पर #JusticeForPuran और #EndPoliceCorruption जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं, जहां लोग दोनों घटनाओं को जोड़कर सिस्टम पर सवाल उठा रहे हैं।
संदीप के परिवार ने कहा कि वह हमेशा सत्य के लिए लड़ते थे, और उनकी मौत एक कुर्बानी है। पुरण के परिवार ने संदीप के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह साजिश का हिस्सा हो सकता है।
आगे की राह:
दोनों मामलों की जांच तेज हो गई है, और एसआईटी को समयबद्ध रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है। सरकार ने प्रभावित परिवारों को सहायता राशि देने की घोषणा की है। यह घटना पुलिस विभाग में मानसिक स्वास्थ्य, भ्रष्टाचार नियंत्रण और जातिगत भेदभाव रोकने के उपायों पर बहस छेड़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सिफारिशें लागू न हुईं, तो ऐसी त्रासदियां दोहराई जा सकती हैं। हरियाणा पुलिस ने अधिकारियों के लिए काउंसलिंग सत्र शुरू करने की योजना बनाई है, ताकि तनाव कम हो। यह मामला न केवल हरियाणा बल्कि पूरे देश के लिए एक सबक है कि आंतरिक सुधार कितने जरूरी हैं।
