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by-Ravindra Sikarwar

केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर FASTag न होने या गैर-कार्यशील होने की स्थिति में लगने वाले जुर्माने (penalty) को कम करने का फैसला किया है। यदि वाहन चालक 15 नवंबर 2025 या उसके बाद UPI (Unified Payments Interface) के माध्यम से टोल (लेनदेन शुल्क) का भुगतान करता है, तो उसे केवल टोल शुल्क का 1.25 गुणा देना होगा। यह प्रस्तावित बदलाव उन लोगों को राहत देगा जो FASTag नहीं रखते या उनकी टैग काम नहीं कर रही।

पहले, ऐसी स्थिति में नकद भुगतान पर वाहन चालक को टोल शुल्क का दोगुना देना पड़ता था।

नियमों में बदलाव — मुख्य बिंदु:

  • नए नियमों के अनुसार, यदि किसी वाहन के पास FASTag नहीं है या उसका FASTag कार्य नहीं कर रहा है, और वह UPI से टोल का भुगतान करता है, तो उसे 1.25 × (अर्थात् 125%) के आधार पर शुल्क देना होगा।
  • वहीं, यदि वह वाहन नकद भुगतान करता है (और FASTag नहीं है या टैग काम नहीं कर रहा है), तो उसे 2 × (दोगुना) शुल्क देना होगा — जैसा कि पुराना प्रावधान था।
  • यह संशोधन National Highways Fee (Determination of Rates and Collection) Rules, 2008 में किया गया है, जिसे परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने अधिसूचित किया है।
  • यह नियम 15 नवंबर 2025 से प्रभावी होगा।
  • एक उदाहरण के रूप में, यदि एक वाहन का सामान्य टोल शुल्क ₹100 है, तो:

  • UPI के ज़रिए भुगतान करने पर शुल्क = ₹125

  • नकद भुगतान करने पर शुल्क = ₹200

उद्देश्य और अपेक्षित लाभ:

  • इस बदलाव का मकसद डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देना और टोल plazas पर नकदी लेनदेन को कम करना है।
  • साथ ही, इससे राजस्व लीकेज (cash leakages) को रोका जाएगा, क्योंकि नकद लेनदेन अक्सर नियंत्रण के बाहर हो जाते हैं।
  • नई व्यवस्था से टोल संचालक (toll operators) अधिक जवाबदेह होंगे — यदि FASTag सिस्टम की इलेक्ट्रॉनिक पहचान विफल हो जाए और वाहन के पास मान्य FASTag हो, तो वाहन को टोल प्लाज़ा पार करने की अनुमति दी जाएगी बिना भुगतान किए। इस स्थिति में “शून्य लेनदेन रसीद (zero-transaction receipt)” जारी करना अनिवार्य होगा।
  • टोल कलेक्शन एजेंसियों के लिए यह आवश्यक होगा कि वे रसीद (receipt) जारी करें जिसमें भुगतान की तिथि और समय, राशि और वाहन श्रेणी (vehicle class) स्पष्ट हो।