by-Ravindra Sikarwar
भारतीय अर्थव्यवस्था ने वित्तीय वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2025) में 7.8% की प्रभावशाली दर से वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में वृद्धि दर्ज की है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, यह पिछले पाँच तिमाहियों में सबसे अधिक वृद्धि है और यह भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और अर्थशास्त्रियों के पूर्वानुमानों को पार कर गई है। यह मजबूत प्रदर्शन वैश्विक आर्थिक चुनौतियों और हाल ही में लगे अमेरिकी टैरिफ से संबंधित चिंताओं के बावजूद, अर्थव्यवस्था की सहनशीलता को दर्शाता है।
मुख्य बिंदु:
- उच्च विकास दर: वित्तीय वर्ष 26 की पहली तिमाही के लिए 7.8% की विकास दर, वित्तीय वर्ष 24 की चौथी तिमाही के बाद से सबसे अधिक है।
- उम्मीदों से बेहतर प्रदर्शन: यह आंकड़ा भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 6.5% के पूर्वानुमान और अन्य बाजार की उम्मीदों को भी पार कर गया है, जो एक सकारात्मक संकेत है।
- क्षेत्रीय समर्थन: इस वृद्धि को सेवा क्षेत्र, मजबूत निजी उपभोग और कृषि उत्पादन में मजबूत प्रदर्शन से समर्थन मिला।
- आर्थिक सहनशीलता: यह डेटा भारतीय अर्थव्यवस्था की वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं का सामना करने की क्षमता को दर्शाता है।
वैश्विक चुनौतियों के संदर्भ में विकास:
यह मजबूत वृद्धि ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका ने भारतीय सामानों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाए हैं। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि पहली तिमाही की वृद्धि का एक हिस्सा “फ्रंट-लोडिंग” प्रभाव था, जहाँ निर्यातकों ने टैरिफ के पूरी तरह से प्रभावी होने से पहले अपने शिपमेंट को तेज़ी से भेजा।
हालाँकि, मजबूत पहली तिमाही के आंकड़ों के बावजूद, भारत के निर्यात-संचालित विकास पर अमेरिकी टैरिफ का पूरा प्रभाव वित्तीय वर्ष की दूसरी छमाही में महसूस होने की उम्मीद है। यह देखना बाकी है कि भारतीय अर्थव्यवस्था इन वैश्विक चुनौतियों के सामने अपनी गति कैसे बनाए रखती है।
