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by-Ravindra Sikarwar

दिल्ली: आगामी उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। विपक्षी दलों के गठबंधन ‘इंडिया’ ब्लॉक ने अपनी तरफ से सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश, न्यायमूर्ति बी. सुदर्शन रेड्डी, को उम्मीदवार बनाने की घोषणा की है। इस घोषणा के साथ ही, यह तय हो गया है कि उनका मुकाबला सत्ताधारी एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) के उम्मीदवार सी.पी. राधाकृष्णन से होगा, जिन्हें पहले ही नामित किया जा चुका है।

न्यायमूर्ति बी. सुदर्शन रेड्डी: विपक्ष का दांव:
‘इंडिया’ ब्लॉक ने अपनी रणनीति के तहत एक गैर-राजनीतिक और प्रतिष्ठित न्यायिक चेहरे को मैदान में उतारने का फैसला किया है। न्यायमूर्ति बी. सुदर्शन रेड्डी, सर्वोच्च न्यायालय के एक सम्मानित पूर्व न्यायाधीश हैं, जिन्हें उनके निष्पक्ष और महत्वपूर्ण फैसलों के लिए जाना जाता है। विपक्ष का मानना है कि उनकी उम्मीदवारी संवैधानिक मूल्यों और लोकतांत्रिक सिद्धांतों को मजबूती देगी। गठबंधन के नेताओं ने एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में उनके नाम की घोषणा करते हुए कहा कि वे उपराष्ट्रपति जैसे संवैधानिक पद के लिए सबसे उपयुक्त उम्मीदवार हैं।

एनडीए के उम्मीदवार सी.पी. राधाकृष्णन:
दूसरी ओर, एनडीए ने अनुभवी राजनेता सी.पी. राधाकृष्णन पर भरोसा जताया है। उपराष्ट्रपति चुनाव में एनडीए के पास स्पष्ट बहुमत होने के कारण, राधाकृष्णन की जीत लगभग तय मानी जा रही है। हालांकि, ‘इंडिया’ ब्लॉक ने यह साफ कर दिया है कि वे संवैधानिक सिद्धांतों की रक्षा और एक मजबूत संदेश देने के लिए चुनाव लड़ेंगे, न कि केवल जीत-हार के लिए।

उपराष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया:
भारत में उपराष्ट्रपति का चुनाव एक इलेक्टोरल कॉलेज द्वारा किया जाता है, जिसमें संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के सभी सदस्य शामिल होते हैं। यह पद महत्वपूर्ण है क्योंकि उपराष्ट्रपति राज्यसभा के पदेन सभापति भी होते हैं। इस पद के लिए मुकाबला अब दो अलग-अलग पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों के बीच होगा – एक न्यायिक और दूसरा राजनीतिक, जो इस चुनाव को और भी दिलचस्प बनाता है।

इस मुकाबले को आगामी राजनीतिक परिदृश्य के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखा जा रहा है। विपक्षी एकता और संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता जैसे मुद्दों पर यह चुनाव एक बड़ी बहस का मंच बन सकता है।