by-Ravindra Sikarwar
गृह मंत्री अमित शाह द्वारा प्रधान मंत्री, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को गंभीर आपराधिक आरोपों में गिरफ्तारी की स्थिति में पद से हटाने के लिए तीन विधेयक पेश किए जाने की संभावना है, जिससे एक महत्वपूर्ण राजनीतिक बहस छिड़ गई है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब हाल ही में कई नेताओं के खिलाफ आपराधिक आरोप लगे हैं, और वे पद पर बने हुए हैं।
विधेयक का सार:
इन विधेयकों का मुख्य उद्देश्य एक कानूनी ढाँचा स्थापित करना है ताकि उन प्रधानमंत्रियों, केंद्रीय मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों, और राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के मंत्रियों को उनके पद से हटाया जा सके, जिन्हें गंभीर आपराधिक आरोपों के चलते गिरफ्तार किया गया हो और 30 दिनों तक लगातार हिरासत में रखा गया हो।
- निष्कासन का नियम: विधेयक के अनुसार, यदि कोई प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री किसी ऐसे अपराध के आरोप में 30 दिनों तक लगातार हिरासत में रहता है, जिसकी सज़ा पांच साल या उससे अधिक की कैद है, तो उसे 31वें दिन उसके पद से हटा दिया जाएगा।
- पुनर्नियुक्ति का प्रावधान: विधेयक में यह भी कहा गया है कि हिरासत से रिहा होने के बाद ऐसे मंत्रियों को फिर से उनके पद पर नियुक्त किया जा सकता है।
- अधिसूचना: गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा सचिवालय को सूचित किया है कि इन विधेयकों को संसद के मौजूदा सत्र में पारित किया जाए।
प्रस्तावित विधेयक और संवैधानिक संशोधन:
ये तीन विधेयक हैं:
- संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025: यह विधेयक भारतीय संविधान के अनुच्छेद 75, 164 और 239AA में संशोधन का प्रस्ताव करता है। इन अनुच्छेदों में वर्तमान में ऐसे किसी भी प्रावधान का अभाव है जो आपराधिक आरोपों के आधार पर मंत्रियों को पद से हटा सके। इस विधेयक का उद्देश्य इस कमी को दूर करना है।
- जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025: यह विधेयक जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 में संशोधन करेगा। इसका उद्देश्य जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री और मंत्रियों के लिए इसी तरह के प्रावधान लाना है।
- केंद्र शासित प्रदेश सरकार (संशोधन) विधेयक, 2025: यह विधेयक केंद्र शासित प्रदेशों, विशेष रूप से पुडुचेरी में, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को हटाने की प्रक्रिया को परिभाषित करेगा।
विधेयक लाने का कारण:
विधेयक के उद्देश्यों और कारणों के विवरण में कहा गया है कि निर्वाचित प्रतिनिधि लोगों की आशाओं और आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं, और उनसे अपेक्षा की जाती है कि उनका चरित्र और आचरण संदेह से परे हो। इसमें यह भी तर्क दिया गया है कि एक मंत्री जो गंभीर आपराधिक आरोपों का सामना कर रहा है और हिरासत में है, वह संवैधानिक नैतिकता और सुशासन के सिद्धांतों को बाधित कर सकता है, जिससे लोगों का संवैधानिक विश्वास कम होता है।
विपक्ष ने इन विधेयकों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है, कांग्रेस का कहना है कि यह कदम राजनीतिक विरोधियों को अस्थिर करने के लिए लाया गया है।
