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by-Ravindra Sikarwar

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने “अगली पीढ़ी के सुधारों” (next-generation reforms) और वस्तु एवं सेवा कर (GST) कानूनों में संशोधन पर चर्चा करने के लिए एक उच्च-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। यह बैठक उनके स्वतंत्रता दिवस के भाषण में करदाताओं पर बोझ कम करने के वादे के बाद हुई है।

बैठक में हुए प्रमुख विचार-विमर्श:
यह बैठक प्रधानमंत्री आवास पर हुई, जिसमें वित्त मंत्री, वित्त सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। बैठक का मुख्य उद्देश्य जीएसटी व्यवस्था को और अधिक सरल, पारदर्शी और करदाताओं के अनुकूल बनाना था। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि जीएसटी को केवल राजस्व संग्रह का जरिया नहीं, बल्कि आर्थिक विकास का एक इंजन बनाना चाहिए।

बैठक में निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर चर्चा हुई:

  • सरलीकरण: छोटे और मझोले व्यवसायों (MSMEs) के लिए फाइलिंग और रिटर्न की प्रक्रिया को और आसान बनाने पर विचार किया गया।
  • दरों में संशोधन: वर्तमान जीएसटी दरों को युक्तिसंगत बनाने और कुछ आवश्यक वस्तुओं पर कर का बोझ कम करने की संभावना पर चर्चा हुई।
  • प्रौद्योगिकी का उपयोग: जीएसटीN (GST Network) को और अधिक कुशल बनाने के लिए नई तकनीकों, जैसे कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) के उपयोग पर विचार-विमर्श हुआ। इससे कर चोरी को रोकने और अनुपालन को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
  • विवाद निवारण तंत्र: जीएसटी से संबंधित कानूनी विवादों को तेजी से निपटाने के लिए एक प्रभावी और समयबद्ध तंत्र स्थापित करने पर भी चर्चा की गई।

प्रधानमंत्री का स्वतंत्रता दिवस का वादा:
प्रधानमंत्री मोदी ने इस साल लाल किले से दिए गए अपने भाषण में कहा था कि सरकार का लक्ष्य “अगली पीढ़ी के सुधारों” के माध्यम से देश के विकास को गति देना है। उन्होंने विशेष रूप से करदाताओं को राहत देने और कर कानूनों को सरल बनाने का वादा किया था। यह उच्च-स्तरीय बैठक उसी वादे को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

सरकार का मानना है कि इन सुधारों से न केवल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि इससे आम जनता और छोटे व्यापारियों को भी बड़ी राहत मिलेगी। इन सुधारों के बाद, उम्मीद है कि आने वाले समय में जीएसटी परिषद की बैठक में कुछ महत्वपूर्ण घोषणाएं की जा सकती हैं।