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by-Ravindra Sikarwar

भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने गुरुवार को आगामी उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए अधिसूचना जारी कर दी है, जिसके साथ ही नामांकन प्रक्रिया आधिकारिक तौर पर शुरू हो गई है। यह चुनाव 9 सितंबर को होगा। यह पद जगदीप धनखड़ के 21 जुलाई को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अचानक इस्तीफा देने के बाद खाली हो गया था। उनका कार्यकाल अगस्त 2027 में समाप्त होने वाला था।

संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, मध्यावधि चुनाव होने की स्थिति में नवनिर्वाचित उपराष्ट्रपति को पूरे पाँच साल का कार्यकाल मिलता है।

उपराष्ट्रपति चुनाव से जुड़ी महत्वपूर्ण तिथियाँ:

  • नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि: 21 अगस्त
  • नामांकन पत्रों की जांच: 22 अगस्त
  • नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि: 25 अगस्त
  • मतदान और परिणाम: 9 सितंबर

उपराष्ट्रपति का चुनाव कैसे होता है?
संविधान के प्रावधानों के अनुसार, उपराष्ट्रपति का चुनाव एक अप्रत्यक्ष प्रक्रिया के माध्यम से होता है। इस चुनाव के लिए एक निर्वाचक मंडल बनाया जाता है, जिसमें लोकसभा और राज्यसभा के सभी निर्वाचित और मनोनीत सदस्य शामिल होते हैं।

  • यह चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के अनुसार एकल संक्रमणीय वोट के माध्यम से होता है।
  • मतदान गुप्त मतदान के जरिए होता है और इसमें किसी भी पार्टी का कोई व्हिप सदस्यों पर लागू नहीं होता है।
  • राष्ट्रपति चुनाव के विपरीत, इस चुनाव में राज्य विधानसभाओं के सदस्यों की कोई भूमिका नहीं होती है।

NDA की मजबूत स्थिति:
उपराष्ट्रपति का चुनाव केवल संसद के सदस्यों द्वारा किया जाता है, ऐसे में सत्तारूढ़ NDA (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) अपने उम्मीदवार को आसानी से जिता सकता है।

  • वर्तमान में संसद के दोनों सदनों की कुल सदस्य संख्या 786 है (जिसमें छह सीटें रिक्त हैं)।
  • अगर 100% मतदान होता है, तो जीतने के लिए किसी उम्मीदवार को 394 वोटों की आवश्यकता होगी।
  • NDA के पास लोकसभा में 293 और राज्यसभा में 129 सांसद हैं, जिससे उसकी कुल संख्या 422 हो जाती है। यह संख्या जीत के लिए आवश्यक 394 के आंकड़े से काफी अधिक है।