Bawankheri murder caseBawankheri murder case
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Bawankheri murder case:उत्तर प्रदेश के चर्चित अमरोहा जिले से एक बड़ी खबर सामने आई है। साल 2008 के बहुचर्चित बावनखेड़ी हत्याकांड का मुख्य दोषी सलीम पूरे 18 साल बाद जेल से बाहर आकर अपने पैतृक गाँव पहुँचा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उसे अपनी बहन की शादी में शामिल होने के लिए 7 दिनों की पैरोल मंजूर की है, जिसके चलते वह पुलिस के कड़े पहरे में अपने घर पर रहेगा।

क्या था पूरा बावनखेड़ी हत्याकांड?

Bawankheri murder case:यह खौफनाक वारदात 14-15 अप्रैल 2008 की रात की है। अमरोहा के हसनपुर क्षेत्र स्थित बावनखेड़ी गाँव में मास्टर शौकत अली और उनके परिवार के सात सदस्यों की गला रेतकर निर्मम हत्या कर दी गई थी। इस भीषण नरसंहार में मास्टर शौकत अली, उनकी पत्नी हाशमी, बेटे अनीस व राशिद, बहू अंजुम, पोता अर्श और भांजी राबिया की जान चली गई थी।

पुलिस जाँच में जो खुलासा हुआ, उसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। शौकत अली की बेटी शबनम और सलीम एक-दूसरे से प्रेम करते थे और शादी करना चाहते थे। परिवार के विरोध और संपत्ति के लालच में आकर दोनों ने मिलकर इस खूनी खेल को अंजाम दिया था। उन्होंने रात के वक्त परिवार के सभी सदस्यों को खाने में नशीला पदार्थ देकर बेहोश कर दिया और फिर एक-एक कर सात लोगों को मौत के घाट उतार दिया। इस मामले में अदालत ने दोनों को फाँसी की सजा सुनाई थी। वर्तमान में शबनम बरेली जेल में बंद है, जबकि सलीम नैनी सेंट्रल जेल में सजा काट रहा है।

बहन की शादी के लिए मिली 7 दिन की पैरोल

Bawankheri murder case:इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार, सलीम को 21 से 27 अक्टूबर तक की पैरोल दी गई है। बुधवार देर रात पुलिस सुरक्षा के बीच उसे उसके गाँव लाया गया। तय समय यानी 27 अक्टूबर की शाम को उसे हर हाल में वापस नैनी जेल में सरेंडर करना होगा। इस दौरान उसकी हर गतिविधि पर पुलिस की पैनी नजर है और वह केवल चुनिंदा रिश्तेदारों से ही मिल सकता है।

ग्रामीणों और परिजनों में भारी आक्रोश

Bawankheri murder case:18 साल बाद सलीम के गाँव लौटने से इलाके में तनाव और सनसनी का माहौल है। मारे गए परिवार के रिश्तेदारों और शबनम के चाचा-चाची ने इस पैरोल पर कड़ा रोष जताया है।

शबनम की चाची फातमा ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि फाँसी की सजा तय होने के बावजूद इतने साल बीत जाने के बाद भी उन्हें अंजाम तक नहीं पहुँचाया गया, और अब पैरोल मिलने से उनके पुराने जख्म फिर से हरे हो गए हैं। वहीं, शबनम के चाचा सत्तार का कहना है कि ऐसे अपराधियों को पैरोल मिलना समाज के लिए गलत संदेश है और वे केवल इन दोनों के लिए जल्द से जल्द फाँसी की सजा की माँग करते हैं।

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