रिपोर्टर: अमन भारद्वाज
MP Schools : मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले मासूम बच्चों के जीवन पर जर्जर भवनों और टपकती छतों का खतरा मंडरा रहा है। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा बुनियादी ढांचे में सुधार को लेकर किए जा रहे दावों की पोल अब खुद विधानसभा में दिए गए बयानों और सरकारी आंकड़ों से खुल रही है। कागजी फाइलों में महज पांच महीनों के भीतर हजारों क्षतिग्रस्त स्कूलों का कायाकल्प कर दिया गया, लेकिन धरातल पर बच्चे आज भी दरकी हुई दीवारों और असुरक्षित भवनों के नीचे शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर हैं।
विधानसभा में 5 महीने के भीतर बदल गए आंकड़े
मध्य प्रदेश विधानसभा के अलग-अलग सत्रों में पेश किए गए सरकारी जवाबों ने शिक्षा विभाग के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फरवरी 2026 के बजट सत्र के दौरान स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने सदन में जानकारी दी थी कि प्रदेश के 5,735 सरकारी स्कूल भवन पूरी तरह जर्जर स्थिति में हैं और लगभग 1,700 से अधिक स्कूलों में शौचालय तक उपलब्ध नहीं हैं। हालांकि, महज पांच महीने बाद जुलाई 2026 के मानसून सत्र में मंत्री का रुख पूरी तरह बदल गया और उन्होंने दावा किया कि राज्य में अब एक भी स्कूल भवन जर्जर नहीं है।
बजट आवंटन और स्वीकृतियों पर उठते सवाल
शिक्षा विभाग का तर्क है कि नए निर्माणों और मरम्मत कार्यों के लिए बजट स्वीकृत किया गया है, लेकिन आंकड़ों का विश्लेषण अलग ही तस्वीर पेश करता है। वर्ष 2026-27 में जर्जर ढांचों के स्थान पर 840 नए स्कूलों और 56 विद्यालयों में 222 अतिरिक्त कमरों की स्वीकृति दी गई। इससे पहले वर्ष 2025-26 में भी 369 हाई व हायर सेकेंडरी स्कूलों के लिए 1,179 कमरे स्वीकृत हुए थे। इन तमाम आंकड़ों को जोड़ने के बावजूद यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि इतनी सीमित स्वीकृतियों के बल पर 5,700 से अधिक जर्जर इमारतों की समस्या का रातों-रात समाधान कैसे हो गया।
पोर्टल दर्ज कर रहा बदहाली की दास्तान
कागजी दावों के विपरीत राज्य शिक्षा केंद्र के आधिकारिक पोर्टल के आंकड़े जमीनी हकीकत बयां कर रहे हैं। पोर्टल के रिकॉर्ड अनुसार वर्तमान में भी प्रदेश के लगभग 5,770 स्कूलों में बड़े स्तर पर मरम्मत कार्य, शौचालय निर्माण या नए भवनों की सख्त आवश्यकता दर्ज है। बैतूल के रिंगढाना और सीहोर के खिड़ियाकुर्मी जैसे क्षेत्रों से आ रही खबरें बताती हैं कि स्कूल परिसरों के हिस्से ढह रहे हैं और छतों से पानी टपक रहा है। कई स्थानों पर तो मरम्मत के लिए आवंटित बजट में वित्तीय अनियमितताओं के मामले भी सामने आए हैं।
विभागीय सफाई और विपक्ष का हमला
इस पूरे मामले पर प्रशासनिक स्तर से सफाई देते हुए लोक शिक्षण संचालनालय के आयुक्त अभिषेक सिंह ने कहा कि प्रदेश में करीब 79 हजार प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं। विभागीय स्तर पर संरचनात्मक सुधार एक निरंतर प्रक्रिया है, जिसके कारण आंकड़ों में मासिक आधार पर बदलाव आता रहता है। दूसरी ओर, इस मुद्दे पर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने राज्य सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मांग की है कि कागजी आंकड़ों में लीपापोती करने के बजाय सरकार को बच्चों की सुरक्षा प्राथमिकता पर रखते हुए विद्यालयों की स्थिति में धरातल पर तुरंत सुधार करना चाहिए।
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