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रिपोर्टर: अरविन्‍द सिंह

Bhopal : राजधानी भोपाल में पाइपेड नेचुरल गैस (PNG) कनेक्शनों की संख्या तेजी से बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है, लेकिन इसके साथ ही उपभोक्ताओं के सामने एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है। पीएनजी कनेक्शन लेते ही उपभोक्ताओं से उनके पुराने एलपीजी कनेक्शन सरेंडर कराए जा रहे हैं, जबकि तकनीकी खराबी या आपूर्ति ठप होने की स्थिति में आपातकालीन व्यवस्था को लेकर कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश या गाइडलाइन मौजूद नहीं है। इसी बीच, हाल ही में शहर के कई इलाकों में गैस आपूर्ति बाधित होने के मामले में मानवाधिकार आयोग ने कड़ा रुख अपनाते हुए सात दिन के भीतर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।

थिंक गैस की आपूर्ति ठप होने से बढ़ी उपभोक्ताओं की मुश्किलें

Bhopal अयोध्या बायपास, अवधपुरी और गोविंदपुरा जैसे प्रमुख क्षेत्रों की कई कॉलोनियों में पीएनजी नेटवर्क तो बिछ चुका है, लेकिन पिछले दिनों अयोध्या बायपास क्षेत्र में थिंक गैस की आपूर्ति अचानक बंद होने से सैकड़ों उपभोक्ताओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। इस घटना ने आपात स्थिति में गैस कंपनियों की जवाबदेही और त्वरित सहायता प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थिति यह है कि पीएनजी आपूर्ति बंद होने पर उपभोक्ताओं के पास फौरन खाना बनाने के लिए कोई वैकल्पिक साधन नहीं बचता है, क्योंकि उनके एलपीजी सिलेंडर पहले ही जमा कराए जा चुके हैं।

मानवाधिकार आयोग का स्वतः संज्ञान और प्रशासनिक अस्पष्टता

Bhopal इस गंभीर मुद्दे पर मध्य प्रदेश मानवाधिकार आयोग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए जिला खाद्य आपूर्ति नियंत्रक से सात दिन के भीतर जवाब मांगा है। इसके बावजूद धरातल पर स्थिति यह है कि प्रशासनिक स्तर पर ऐसी कोई स्पष्ट नीति या वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है, जो संकट के समय उपभोक्ताओं को राहत दे सके। खाद्य आपूर्ति विभाग के अधिकारी भी स्वीकार करते हैं कि पीएनजी कनेक्शन और आपातकालीन सेवाओं को लेकर फिलहाल कोई पुख्ता और जवाबदेह नियमावली तय नहीं की गई है, जिससे प्रशासनिक लापरवाही पर सख्त कार्रवाई करना मुश्किल हो जाता है।

एलपीजी के स्पष्ट नियम बनाम पीएनजी की अनिश्चित व्यवस्था

Bhopal एलपीजी कनेक्शन के मामले में नियम पूरी तरह स्पष्ट हैं, जहां किसी भी प्रकार की कोताही पर डीलर और तेल कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान है। इसके विपरीत, पीएनजी नेटवर्क के विस्तार के नाम पर टारगेट पूरे किए जा रहे हैं और थिंक गैस द्वारा कई क्षेत्रों में उपभोक्ताओं को एलपीजी कनेक्शन सरेंडर करने के नोटिस भी जारी किए जा चुके हैं। यदि उपभोक्ता अपने पुराने विकल्प हमेशा के लिए बंद कर देते हैं, तो भविष्य में तकनीकी खराबी आने पर उनकी मदद कौन करेगा, यह एक बड़ा और अनुत्तरित सवाल बना हुआ है।

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