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रिपोर्टर: अरविन्‍द सिंह

Bhopal : राजधानी भोपाल में दिव्यांग बच्चों के लिए संचालित शासकीय दृष्टि एवं श्रवण बाधितार्थ उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की जमीनी स्थिति ने दावों की पोल खोल दी है। सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के इस स्कूल में मूलभूत सुविधाओं के साथ-साथ शैक्षणिक स्तर की भारी गिरावट देखने को मिल रही है। 190 से अधिक विद्यार्थियों के भविष्य पर संकट मंडरा रहा है।

शिक्षकों का भारी अकाल, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ले रहे कक्षाएं

Bhopal कक्षा 1 से 12 तक नामांकित लगभग 190 विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए केवल 3 शिक्षक उपलब्ध हैं। आलम यह है कि पर्याप्त स्टाफ न होने के कारण चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी बच्चों को पढ़ाने के लिए मजबूर हैं। इसके अलावा, श्रवण बाधित विद्यार्थियों के लिए आवश्यक ‘साइन लैंग्वेज इंटरप्रेटर’ की सुविधा भी न के बराबर है, जिससे बच्चों की नियमित पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है।

एक ही कमरे में कई कक्षाओं के बच्चे, शिक्षण व्यवस्था ठप

Bhopal स्कूल की अव्यवस्था का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कक्षा 5, 7 और 8 के छात्रों को एक ही कमरे में बैठाकर पढ़ाया जा रहा है। बच्चों ने शिकायत की है कि उन्हें जिस विशेष शिक्षण और मार्गदर्शन की आवश्यकता है, वह नहीं मिल पा रहा है। अपनी मांगों को लेकर छात्र एक सप्ताह पूर्व प्रदर्शन भी कर चुके हैं, लेकिन स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ।

सीलन भरे हॉस्टल के कमरे और वॉशरूम में पसरी गंदगी

Bhopal हॉस्टल में रहने वाले विद्यार्थियों के लिए सुविधाएं बेहद दयनीय हैं। कमरों की दीवारों पर भारी सीलन और दुर्गंध फैली हुई है, जबकि वॉशरूम की साफ-सफाई पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। भोजन की खराब गुणवत्ता को लेकर भी छात्रों ने नाराजगी जताई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला पंचायत उपाध्यक्ष मोहन जाट ने अधिकारियों की लापरवाही पर शिकायत दर्ज कराने की बात कही है।

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