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रिपोर्टर: वेदान्‍त साहू

Burnpur Cinema Hall Demolished SAIL ISP : पश्चिम बंगाल के बर्दवान जिले के बर्नपुर में इस्को स्टील प्लांट (SAIL-ISP) द्वारा अपनी जमीनों को कब्जा मुक्त कराने का महा-अभियान लगातार जारी है। इसी कड़ी में रविवार को बर्नपुर के गौरवशाली इतिहास का हिस्सा रहे लगभग 60 वर्ष पुराने ‘बर्नपुर सिनेमा हॉल’ को भारी सुरक्षा के बीच बुलडोजर चलाकर जमींदोज कर दिया गया। कभी पूरे इलाके में मनोरंजन का सबसे मुख्य केंद्र रही इस ऐतिहासिक इमारत को ढहता देख स्थानीय लोग और खासकर बुजुर्ग बेहद भावुक और मायूस नजर आए।

Burnpur Cinema Hall Demolished SAIL ISP बंद पड़े सिनेमा हॉल से जुड़ी थीं बुजुर्गों की यादें, विरासत टूटने का दर्द

यह सिनेमा हॉल पिछले काफी समय से बंद पड़ा था, लेकिन एक दौर ऐसा था जब यहाँ पैर रखने की जगह नहीं होती थी। स्थानीय वरिष्ठ नागरिकों ने अपनी पुरानी यादें साझा करते हुए बताया कि उन्होंने अपने परिवार और दोस्तों के साथ जीवन की कई ब्लॉकबस्टर और लोकप्रिय फिल्मों का लुत्फ इसी हॉल में लिया था। इमारत के ढहते ही लोगों के जेहन में वह सुनहरा दौर एक बार फिर ताजा हो गया। लोगों के लिए यह सिर्फ एक कंक्रीट का ढांचा नहीं, बल्कि बर्नपुर की सांस्कृतिक विरासत और उनकी भावनाओं का एक अहम हिस्सा था।

Burnpur Cinema Hall Demolished SAIL ISP राजनीतिक बदलाव के बाद SAIL-ISP का कड़ा रुख, अवैध निर्माणों पर एक्शन

जानकारों के मुताबिक, राज्य में हालिया राजनीतिक समीकरणों में आए बदलाव के बाद से ही सेल-इस्को स्टील प्लांट (SAIL-ISP) प्रशासन अपनी जमीनों पर हुए कथित अवैध कब्जों को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाए हुए है। इस बड़े बेदखली अभियान के तहत अब तक अलग-अलग राजनीतिक दलों के दफ्तरों, स्थानीय क्लबों और अन्य अवैध निर्माणों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। चूंकि यह ऐतिहासिक सिनेमा हॉल भी सेल (SAIL) की ही जमीन पर बना हुआ था, इसलिए प्रबंधन ने इसे भी अतिक्रमण हटाने की सूची में शामिल कर ध्वस्त करने का कड़ा फैसला लिया।

Burnpur Cinema Hall Demolished SAIL ISP “सामुदायिक केंद्र बन सकती थी धरोहर” – जनहित में इस्तेमाल न करने पर उठे सवाल

इस कार्रवाई को लेकर स्थानीय जनता के एक बड़े वर्ग में नाराजगी और निराशा भी देखी जा रही है। लोगों का तर्क है कि 60 साल पुरानी इस मजबूत और ऐतिहासिक धरोहर को पूरी तरह मलबे में तब्दील करने के बजाय, इसका संरक्षण किया जा सकता था। नागरिकों का मानना है कि प्रशासन इस आलीशान इमारत को किसी पब्लिक लाइब्रेरी, कम्युनिटी हॉल (सामुदायिक भवन) या अन्य किसी जनहित के काम में बदल सकता था, जिससे यह अनमोल विरासत भी बच जाती और समाज का भला भी होता। बहरहाल, इस संवेदनशील और भावनात्मक मुद्दे पर SAIL-ISP प्रबंधन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान या सफाई सामने नहीं आई है।

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