Iran-US TensionIran-US Tension
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Iran-US Tension : मध्य पूर्व में युद्ध की लपटें अब एक खतरनाक मोड़ पर पहुँच चुकी हैं। अमेरिका और इज़रायल द्वारा ईरान पर किए जा रहे निरंतर हमलों ने इस क्षेत्र को बारूद के ढेर पर ला खड़ा किया है। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कड़ी चेतावनी—कि अमेरिका ईरान में ‘अकल्पनीय तबाही’ ला सकता है—के बाद तेहरान ने भी स्पष्ट कर दिया है कि वह झुकने वाला नहीं है। लेकिन इस कूटनीतिक युद्ध के बीच अब ‘यूरेनियम’ के इर्द-गिर्द एक नई और रहस्यमयी कहानी बुनी जा रही है।

Iran-US Tension एफ-15E स्ट्राइक ईगल: साहसी रेस्क्यू या कोई गुप्त मिशन?

हालिया तनाव की शुरुआत तब हुई जब ईरान ने दावा किया कि उसने अमेरिकी वायुसेना के एक शक्तिशाली एफ-15E स्ट्राइक ईगल विमान को मार गिराया है। इस घटना के बाद 5 अप्रैल को दक्षिण-पश्चिम ईरान में अमेरिकी सेना द्वारा एक बड़े स्तर का ‘खोज और बचाव’ (Search and Rescue) अभियान चलाया गया।

अमेरिकी रक्षा विशेषज्ञों ने इसे इतिहास के सबसे साहसी अभियानों में से एक बताया, जिसमें लापता पायलट को सुरक्षित बाहर निकालने का दावा किया गया। हालांकि, इस पूरे ऑपरेशन की टाइमिंग और लोकेशन पर ईरान ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ईरान का कहना है कि जिस स्थान पर पायलट के होने की बात कही गई और जहाँ अमेरिकी सेना ने अपनी सक्रियता दिखाई, उन दोनों जगहों के बीच काफी बड़ा अंतर था। तेहरान के अनुसार, यह रेस्क्यू ऑपरेशन केवल एक पर्दा था, जिसके पीछे के इरादे कुछ और ही थे।

Iran-US Tension यूरेनियम चोरी का आरोप और अमेरिका की ‘आड़’

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाक़ाई ने इस पूरे मामले को एक नया मोड़ देते हुए अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाए हैं। बाक़ाई के मुताबिक, पायलट को बचाने का यह मिशन दरअसल ईरान के समृद्ध यूरेनियम को चुराने की एक साजिश हो सकता है।

ईरान का मानना है कि अमेरिका ‘सर्च ऑपरेशन’ के बहाने उन संवेदनशील इलाकों तक पहुँचना चाहता था जहाँ परमाणु सामग्री या उससे जुड़ी गुप्त जानकारियां मौजूद हैं। प्रवक्ता ने इसे अमेरिका की एक बड़ी ‘रणनीतिक विफलता’ करार देते हुए कहा कि ईरान की संप्रभुता के साथ खिलवाड़ करने के लिए ‘बचाव अभियान’ को एक बहाने (Pretext) के तौर पर इस्तेमाल किया गया है। यह आरोप अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक नया विवाद पैदा कर सकता है, क्योंकि यह सीधे तौर पर परमाणु संपदा की सुरक्षा से जुड़ा है।

Iran-US Tension परमाणु ठिकानों पर मंडराता खतरा: इस्फ़हान और नतान्ज़ की घेराबंदी

वर्तमान में ईरान के पास लगभग 400 से 450 किलोग्राम तक समृद्ध यूरेनियम होने का अनुमान है। इसमें से एक बड़ा हिस्सा 60 प्रतिशत तक समृद्ध है, जिसे मामूली तकनीकी प्रक्रिया के बाद आसानी से हथियार-ग्रेड (Weapons-grade) परमाणु सामग्री में बदला जा सकता है।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो अमेरिका इस परमाणु भंडार को ईरान के नियंत्रण से बाहर करने के लिए ‘ग्राउंड ऑपरेशन’ यानी जमीनी कार्रवाई की योजना बना रहा है। तनाव का मुख्य केंद्र अब इस्फ़हान और नतान्ज़ के परमाणु ठिकाने बन गए हैं। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने संकेत दिए हैं कि हालिया बमबारी के बावजूद ईरान की मुख्य परमाणु सामग्री इन भूमिगत ठिकानों में सुरक्षित है।

अब कूटनीतिक गलियारों में यह चर्चा आम है कि अमेरिका युद्ध विराम की शर्त के रूप में ईरान के सामने अपना पूरा यूरेनियम भंडार सौंपने का प्रस्ताव रख सकता है। यदि ऐसा होता है, तो यह ईरान के लिए आत्मसमर्पण जैसा होगा, जिसके लिए वह फिलहाल तैयार नहीं दिखता।

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