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Report by: Ravindra Singh

Bhopal : राजधानी के कोटरा स्थित सरस्वती विद्या मंदिर उच्च माध्यमिक विद्यालय में वार्षिक परीक्षा परिणाम की घोषणा के साथ ही ‘प्रतिभा अभिनंदन समारोह’ का भव्य आयोजन किया गया। इस गौरवशाली अवसर पर भोपाल नगर निगम के अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए। उन्होंने अपनी उपस्थिति से न केवल विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया, बल्कि शैक्षणिक सत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को पदक और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित भी किया।

संस्कार आधारित शिक्षा की महत्ता: अध्यक्ष का संबोधन

Bhopal समारोह को संबोधित करते हुए किशन सूर्यवंशी ने सरस्वती शिशु मंदिर की शिक्षा पद्धति की जमकर सराहना की। उन्होंने शिक्षा के साथ-साथ चरित्र निर्माण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा:

  • संस्कारवान नागरिक: सरस्वती विद्या मंदिर केवल किताबी ज्ञान देने वाला केंद्र नहीं है, बल्कि यह समाज को ऐसे शिक्षित नागरिक दे रहा है जो भारतीय मूल्यों और संस्कारों से ओतप्रोत हैं।
  • राष्ट्र निर्माण में भूमिका: उन्होंने जोर देकर कहा कि देशभर में यदि कोई संस्थान वास्तविक अर्थों में संस्कार आधारित शिक्षा की मशाल जलाए हुए है, तो वह सरस्वती विद्या मंदिर ही है। यहाँ से निकले विद्यार्थी न केवल करियर में सफल होते हैं, बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी भी समझते हैं।

मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान और उत्साहवर्धन

Bhopal वार्षिक परीक्षा परिणामों के आधार पर अपनी कक्षाओं में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को मंच पर बुलाकर सम्मानित किया गया। किशन सूर्यवंशी ने प्रत्येक मेधावी छात्र को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह सफलता उनके कठिन परिश्रम और आचार्यों के सही मार्गदर्शन का परिणाम है।

अभिभावकों से संवाद करते हुए उन्होंने अपील की कि वे बच्चों की प्रतिभा को पहचानें और उन्हें अपनी रुचि के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करें।

समारोह की झलकियां और उपस्थिति

Bhopal इस गरिमामय आयोजन का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों के भीतर छिपी प्रतिभा को निखारना और उनके आत्मविश्वास को नई उड़ान देना था। कार्यक्रम में विद्या भारती के पदाधिकारियों सहित शिक्षा जगत की कई प्रमुख हस्तियां उपस्थित रहीं:

  1. गणमान्य अतिथि: विद्या भारती से श्री बीरेन्द्र सिंह सेंगर, सुशील मित्तल, राजेश पाण्डेय, विकास शर्मा, रामप्रताप राही और शैलेंद्र यादव।
  2. सहभागिता: विद्यालय के समस्त आचार्यगण (शिक्षक), कर्मचारी और बड़ी संख्या में भैया-बहन (विद्यार्थी) इस उत्सव का हिस्सा बने।
  3. सांस्कृतिक संदेश: आयोजन के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि शिक्षा का वास्तविक लक्ष्य केवल अंक प्राप्त करना नहीं, बल्कि एक श्रेष्ठ व्यक्तित्व का निर्माण करना है।

समारोह के अंत में विद्यालय प्रबंधन ने मुख्य अतिथि का आभार व्यक्त किया। परीक्षा परिणामों के बाद अब नए शैक्षणिक सत्र के लिए विद्यार्थियों में एक नई ऊर्जा और संकल्प का संचार देखा गया।

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