By: Ravindra Sikarwar
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में चल रहे विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) अभियान ने बड़ा खुलासा किया है। जिले की सातों विधानसभाओं में कुल मिलाकर करीब 2 लाख 11 हजार मतदाताओं का कोई अता-पता नहीं चल सका। ये वे लोग हैं जो वोटर लिस्ट में दर्ज पते पर नहीं मिले और इनका डेटा 2003 से पहले की पुरानी सूचियों से भी पूरी तरह मैच नहीं कर रहा। इन्हें ‘नो-मैपिंग’ श्रेणी में रखा गया है। अब जिला निर्वाचन विभाग ने अंतिम मौका देते हुए इन सभी की दोबारा तलाश शुरू करने का फैसला लिया है।
बुधवार देर शाम तक फील्ड से आई अंतिम रिपोर्ट के मुताबिक भोपाल जिले में कुल 17 लाख 17 हजार से ज्यादा SIR फॉर्म डिजिटल किए जा चुके हैं। इनमें से लगभग 4.43 लाख मतदाता या तो मृत पाए गए, या फिर स्थायी रूप से कहीं और चले गए। लेकिन सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि 2,11,275 मतदाताओं की पहचान ही नहीं हो पाई। इनका रिकॉर्ड्स का डिजिटल डेटाबेस से मिलान नहीं हो सका। अब 12 दिसंबर से BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) और ERO (इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर) इन सभी के घर-घर जाकर अंतिम बार सत्यापन करेंगे।
जिला कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने साफ कहा है कि किसी भी वास्तविक मतदाता को परेशान करने का इरादा नहीं है, लेकिन फर्जी, डुप्लिकेट और मृत लोगों के नाम मतदाता सूची में नहीं रहने चाहिए। इसलिए नो-मैपिंग श्रेणी में आए हर नाम की अलग-अलग सुनवाई होगी। इसके लिए पूरे 50 दिन का समय दिया जाएगा। इस दौरान संबंधित व्यक्ति या उनके परिवार वाले दस्तावेज पेश करके अपना नाम बचा सकते हैं। अगर तय समय में कोई दस्तावेज या सबूत नहीं मिलता, तो ही नाम हटाने की कार्रवाई होगी। कलेक्टर ने इसे “अदालत जैसी निष्पक्ष सुनवाई” बताया है।
सबसे ज्यादा गड़बड़ी नरेला और गोविंदपुरा में सामने आई है। नरेला विधानसभा में 51,029 मतदाता (लगभग 14.38%) नो-मैपिंग श्रेणी में हैं, जबकि गोविंदपुरा में यह आंकड़ा 43,611 तक पहुंच गया है। अधिकारी मान रहे हैं कि ज्यादातर लोग या तो शहर छोड़कर चले गए हैं या उनका देहांत हो चुका है, लेकिन कागजों में नाम आज भी जिंदा है।
निर्वाचन विभाग ने पारदर्शिता के लिए बड़ा कदम उठाया है। हर विधानसभा में अतिरिक्त 100 सहायक इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन अधिकारी (ARO) नियुक्त किए जा रहे हैं। BLO खुद मतदाता के घर जाएंगे, फोटो लेंगे, दस्तावेज देखेंगे और फॉर्म भरवाएंगे। उप जिला निर्वाचन अधिकारी भुवन गुप्ता ने कहा, “हमारा लक्ष्य एक भी असली मतदाता का नाम गलती से न कटे, लेकिन जो लोग दशकों से लापता हैं या जिनका कोई रिकॉर्ड ही नहीं है, उन्हें सूची से हटाना जरूरी है।”
16 दिसंबर को विशेष पुनरीक्षण के बाद अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होगी। उसके बाद नए लोग फॉर्म-6 भरकर नाम जुड़वा सकेंगे, पुराने मतदाता पता बदलवा सकेंगे या सुधार करवा सकेंगे। जो लोग नो-मैपिंग में हैं, उनके लिए यही आखिरी मौका है कि वे अपने आधार कार्ड, बिजली बिल, राशन कार्ड या कोई भी वैध दस्तावेज देकर अपना नाम बचा लें।
यह अभियान पूरे देश में चल रहे मतदाता सूची शुद्धिकरण का हिस्सा है, लेकिन भोपाल में इसका स्केल बेहद बड़ा है। अगर 2 लाख से ज्यादा नाम सचमुच हटते हैं, तो यह राजधानी की चुनावी तस्वीर को काफी हद तक बदल सकता है। फिलहाल विभाग की पूरी मशीनरी मैदान में उतर चुकी है और अगले 50 दिन भोपाल के लिए बेहद अहम होने वाले हैं।
