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By: Ravindra Sikarwar

भोपाल की सांस्कृतिक धरा एक बार फिर संगीत और कला की अलौकिक ऊर्जा से भर उठी, जब बहुप्रतीक्षित संगीत–कला समारोह ‘हृदय दृश्यम’ का आठवाँ संस्करण रवीन्द्र भवन में सुरुचिपूर्ण ढंग से आरंभ हुआ। मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति एवं पर्यटन विभाग द्वारा आयोजित यह महोत्सव वर्ष दर वर्ष कला प्रेमियों के लिए एक विशिष्ट मंच के रूप में अपनी पहचान बना चुका है, और इस बार भी कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ अत्यंत गरिमामय वातावरण में हुआ।

शुभारंभ अवसर पर संस्कृति संचालक एन.पी. नामदेव, समारोह के क्यूरेटर जो अलवारिस, ओमेगा बैंक के प्रबंध संचालक सुशील प्रकाश और जहाँनुमा होटल के निदेशक फैज राशिद की उपस्थिति ने आयोजन की गंभीरता और महत्व को और अधिक प्रखर बना दिया। इस अवसर पर आयोजकों ने कार्यक्रम को संस्कृति, विरासत और संगीत के उत्सव के रूप में वर्णित किया।

सरोद की सुरलहरियों ने बाँधा समा
समारोह के प्रथम दिवस की शुरुआत भारतीय शास्त्रीय संगीत के दो युवा और प्रतिष्ठित कलाकारों – अमान अली बंगश और अयान अली बंगश – की सरोद वादन प्रस्तुति से हुई। सेनिया बंगश घराने की समृद्ध परंपरा का प्रतिनिधित्व करते हुए दोनों कलाकारों ने मंच पर ऐसा सुर संसार रचा, जिसमें संवेदना, सादगी और साधना एक साथ प्रवाहित होती रहीं।

उनकी प्रस्तुति की शुरुआत राग देश से हुई, जिसकी धुनों ने वातावरण में कोमलता और शांति का भाव जगाया। उसके बाद उन्होंने राग रागेश्री प्रस्तुत किया, जिसकी गहराई और मधुरता ने दर्शकों को एक शांत, ध्यानमग्न अवस्था में पहुँचा दिया। अंत में प्रस्तुत भटियाली धुन ने पूरे सभागार में आनंद और मधुर उल्लास की तरंगें प्रवाहित कर दीं। इस प्रस्तुति में तबले पर अशेष उपाध्याय और रामेंद्र सिंह सोलंकी की संगत उल्लेखनीय रही।

मधुवंती बागची की गायकी ने जीत लिया मन
सरोद प्रस्तुति के बाद कार्यक्रम का रंग तब और निखरा जब प्रसिद्ध गायिका मधुवंती बागची मंच पर आईं। उन्होंने अपनी प्रस्तुति की आरंभिक प्रार्थना ‘आई गिरी नंदिनी’ से किया, जिसने वातावरण में भक्ति और दिव्यता की अनुभूति उत्पन्न कर दी।

इसके पश्चात उन्होंने एक के बाद एक ऐसे गीत प्रस्तुत किए, जिन्होंने श्रोताओं के हृदय को भावनाओं से भर दिया।

गीत–

  • ‘शायद कभी न कह सकें…’
  • ‘रंजिश ही सही…’
  • ‘ये मोह मोह के धागे तेरी उंगलियों से जा उलझे…’
  • ‘जरा जरा बहकता है…’

ने दर्शकों को संगीत के एक सुंदर और भावनात्मक सफर पर पहुँचा दिया।

अगले दिन चमन महल में होगा सांस्कृतिक उत्सव
कार्यक्रम का दूसरा दिन और भी भव्य होने वाला है। अगले दिन ऐतिहासिक चमन महल, जगदीशपुर में दो महत्वपूर्ण प्रस्तुतियाँ होंगी:

  • शाम 5:30 बजे सुप्रसिद्ध सितार वादक पंडित रवि चारी अपनी प्रस्तुति देंगे।
  • रात 8:15 बजे तबला वादन की मनमोहक प्रस्तुति के साथ पंडित आदित्य कल्याणपुरकर संगीत प्रेमियों को मंत्रमुग्ध करेंगे।

इसके साथ ही परिसर में पारंपरिक हस्तशिल्प, लोक–कला और क्षेत्रीय व्यंजनों का मेला भी सजेगा, जो प्रदेश की विरासत को जीवंत रूप में प्रस्तुत करेगा।

समापन
‘हृदय दृश्यम’ ने एक बार फिर यह साबित किया है कि कला, संगीत और संस्कृति ही वह सूत्र हैं, जो समाज को उसकी जड़ों से जोड़कर आत्मा को समृद्ध करते हैं। भोपाल में सजी यह सुरमयी शाम न केवल एक आयोजन थी, बल्कि कला के प्रति समर्पित साधना और परंपरा का उत्सव भी थी – जिसने हर श्रोता के मन में संगीत की गूंज छोड़ दी।