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by-Ravindra Sikarwar

मध्य प्रदेश के जंगलों में चीते और बाघ अब सिर्फ शिकारियों से नहीं, एक अदृश्य दुश्मन से भी खतरे में हैं — कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV)। यह वायरस कुत्तों से निकलकर सीधे बड़े बिल्लियों तक पहुँच सकता है और कुछ ही दिनों में उनकी जान ले लेता है। 

इसी खतरे को देखते हुए वन विभाग ने फिर से बड़ा अभियान शुरू किया है। कूनो नेशनल पार्क (जहाँ नामीबिया-दक्षिण अफ्रीका से लाए गए चीते हैं) और पन्ना टाइगर रिजर्व के बफर जोन तथा आसपास के गाँवों-कस्बों में रहने वाले हर बेसहारा और पालतू कुत्ते-कुतिया को CDV और रैबीज का टीका लगाया जाएगा। 

पहले भी हो चुकी है ऐसी मौतें :

  • 2015 में पन्ना टाइगर रिजर्व में एक बाघ की लाश मिली थी। बरेली के इंडियन वेटरनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट (IVRI) की जांच में पुष्टि हुई कि मौत कैनाइन डिस्टेंपर वायरस से हुई थी। उस समय भी करीब 1200 कुत्तों का टीकाकरण किया गया था। 
  • 2024 में छतरपुर जिले में एक बाघ और एक तेंदुए में CDV के लक्षण मिले थे। 
  • संजय टाइगर रिजर्व में एक बाघ को रैबीज वायरस ने मार डाला था। 

कैसे फैलता है यह वायरस? 
CDV हवा के जरिए, संक्रमित कुत्ते के लार, नाक के स्राव, मल-मूत्र या दूषित पानी-खाने से तेजी से फैलता है। यह जानवर के फेफड़े, आंत और दिमाग पर हमला करता है। एक बार संक्रमण हुआ तो बचने की संभावना बहुत कम रह जाती है। 

अब क्या होगा? 
वन विभाग की टीमें गाँव-गाँव जाकर कुत्तों को पकड़ेंगी, टीका लगाएंगी और कान में निशान (notch) डालकर छोड़ेंगी ताकि दोबारा पकड़ने में आसानी हो। पिछले साल भी ऐसा अभियान चलाया गया था, इस बार दायरा और बड़ा किया जा रहा है। 

कूनो में चीते और पन्ना में बाघ — दोनों ही प्रजातियाँ देश के लिए कीमती हैं। नामीबिया से लाया गया हर चीता करोड़ों रुपये का है और पन्ना तो बाघों को वापस लाने की मिसाल है। एक छोटा सा वायरस इन सारी कोशिशों पर पानी फेर सकता है। 

इसलिए अब जंगलों की सुरक्षा सिर्फ गश्त और कैमरे से नहीं, गाँव के आवारा कुत्तों के टीके से भी हो रही है। 

क्योंकि जंगल और गाँव की दूरी अब सिर्फ कुछ किलोमीटर नहीं, बल्कि एक कुत्ते की छींक जितनी रह गई है।