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by-Ravindra Sikarwar

वाशिंगटन डीसी: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार (13 नवंबर 2025) को अपनी नई एच-1बी वीजा नीति की घोषणा की, जिसका मूल मंत्र है—”अमेरिका आओ, अमेरिकी श्रमिकों को ट्रेनिंग दो और फिर घर लौट जाओ।” यह नीति अमेरिकी तकनीकी उद्योग में विदेशी विशेषज्ञों की भूमिका को सीमित करने और अमेरिकी नागरिकों के लिए अधिक नौकरियां सुनिश्चित करने पर केंद्रित है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यह कदम “अमेरिका फर्स्ट” सिद्धांत को मजबूत करेगा, लेकिन भारतीय आईटी कंपनियों और अन्य देशों के पेशेवरों के बीच चिंता की लहर पैदा कर दिया है। नीति के तहत एच-1बी वीजा धारकों को अनिवार्य रूप से अमेरिकी कर्मचारियों को कौशल हस्तांतरण (स्किल ट्रांसफर) देना होगा, उसके बाद वीजा नवीनीकरण पर रोक लगाई जाएगी। यह बदलाव 1 जनवरी 2026 से लागू होगा।

नीति का पृष्ठभूमि और उद्देश्य:
एच-1बी वीजा कार्यक्रम 1990 के इमिग्रेशन एक्ट के तहत शुरू हुआ था, जो उच्च कौशल वाले विदेशी पेशेवरों (जैसे सॉफ्टवेयर इंजीनियर, डॉक्टर, वैज्ञानिक) को अमेरिकी कंपनियों में काम करने की अनुमति देता है। हर साल 85,000 वीजा जारी होते हैं, जिनमें से लगभग 70% भारतीय प्राप्तकर्ताओं को जाते हैं। ट्रंप के पहले कार्यकाल (2017-2021) में भी इस कार्यक्रम पर सख्ती की गई थी, लेकिन अब उनकी दूसरी पारी में यह नीति और कठोर हो गई है।

ट्रंप ने व्हाइट हाउस में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “हम अमेरिका को फिर से महान बनाना चाहते हैं। विदेशी श्रमिकों का स्वागत है, लेकिन वे यहां आकर नौकरियां छीनने नहीं, बल्कि अमेरिकी युवाओं को सशक्त बनाने के लिए आएंगे। आओ, ट्रेनिंग दो और सम्मानपूर्वक लौट जाओ—यह नया नियम है।” उनका तर्क है कि विदेशी कर्मचारी कम वेतन पर काम करते हैं, जिससे अमेरिकी नागरिकों की बेरोजगारी बढ़ती है। यूएस चैंबर ऑफ कॉमर्स के आंकड़ों के अनुसार, एच-1बी वीजा धारक औसतन 20% कम सैलरी पर काम करते हैं, जो अमेरिकी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाता है।

नीति के प्रमुख प्रावधान:
नई नीति को “ट्रेन एंड ट्रांजिशन एक्ट” नाम दिया गया है, जो यूएस सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज (यूएससीआईएस) द्वारा लागू किया जाएगा। इसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

प्रावधानविवरण
अनिवार्य ट्रेनिंग अवधिएच-1बी वीजा धारक को पहले 6-12 महीनों में अमेरिकी कर्मचारियों को अपने क्षेत्र की ट्रेनिंग देनी होगी। ट्रेनिंग का प्रमाणपत्र कंपनी को जमा करना अनिवार्य।
वीजा नवीनीकरण पर रोकट्रेनिंग पूरा होने के बाद वीजा का विस्तार केवल तभी संभव होगा, जब कंपनी साबित करे कि कोई अमेरिकी नागरिक उपलब्ध नहीं है। अन्यथा, वीजा रद्द।
कंपनी दंडयदि कंपनी ट्रेनिंग नियम तोड़ती है, तो 50,000 डॉलर का जुर्माना और 2 वर्षों के लिए एच-1बी आवेदन पर रोक।
लॉटरी सिस्टम में बदलाववीजा आवंटन अब वेतन के आधार पर होगा—उच्च वेतन वाली नौकरियों को प्राथमिकता। न्यूनतम वेतन सीमा 1,20,000 डॉलर सालाना।
परिवार वीजा प्रतिबंधएच-4 वीजा (परिवार के सदस्यों के लिए) पर भी सख्ती; पति/पत्नी को काम करने की अनुमति केवल ट्रेनिंग के बाद।
डिजिटल ट्रैकिंगसभी वीजा धारकों का डेटा एक नई ऐप के माध्यम से मॉनिटर किया जाएगा।

यह नीति विशेष रूप से आईटी, हेल्थकेयर और इंजीनियरिंग क्षेत्रों को प्रभावित करेगी, जहां 80% एच-1बी वीजा का उपयोग होता है।

प्रभावित पक्ष: भारतीय आईटी कंपनियां सबसे ज्यादा चिंतित
भारत अमेरिका को सबसे अधिक एच-1बी वीजा भेजता है। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), इंफोसिस, विप्रो और एचसीएल जैसी कंपनियां सालाना 20,000 से अधिक वीजा के लिए आवेदन करती हैं। नास्कॉम के अनुसार, इस नीति से 2026 में 15% भारतीय पेशेवरों की नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं।

  • कंपनी प्रतिक्रिया: टीसीएस के सीईओ के. कृष्णमूर्ति ने कहा, “यह नीति अमेरिकी नवाचार को नुकसान पहुंचाएगी। हम अमेरिकी कर्मचारियों को ट्रेनिंग देने को तैयार हैं, लेकिन जबरन वीजा रद्दीकरण से परियोजनाएं बाधित होंगी।”
  • व्यक्तिगत प्रभाव: बेंगलुरु के सॉफ्टवेयर इंजीनियर राहुल मेहता (एच-1बी धारक) ने बताया, “मैंने 3 साल अमेरिका में बिताए, लेकिन अब ट्रेनिंग के बाद वापस लौटना पड़ेगा। परिवार का क्या होगा?”
  • अमेरिकी पक्ष: सिलिकॉन वैली की कंपनियां जैसे गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और अमेजन ने विरोध जताया। माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्या नडेला ने कहा, “प्रतिभा सीमित करने से अमेरिका पिछड़ जाएगा।”

आंकड़े और तथ्य: एच-1बी का वर्तमान परिदृश्य

वर्षजारी वीजाभारतीय प्राप्तकर्ता (%)औसत वेतन (डॉलर)अस्वीकृति दर (%)
2023850007210500015
2024850007011000020
2025 (अनुमान)850006811500025

ट्रंप प्रशासन के अनुसार, इस नीति से 2026 तक 50,000 नई नौकरियां अमेरिकी नागरिकों के लिए सृजित होंगी। हालांकि, ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट कहती है कि इससे अमेरिकी जीडीपी में 0.5% की कमी आ सकती है।

राजनीतिक संदर्भ और भविष्य:
यह नीति ट्रंप की 2024 चुनावी रणनीति का हिस्सा थी, जहां उन्होंने आप्रवासन को प्रमुख मुद्दा बनाया। रिपब्लिकन पार्टी इसे “राष्ट्रीय सुरक्षा” से जोड़ रही है, जबकि डेमोक्रेट्स इसे “रोजगार विरोधी” बता रहे हैं। बाइडेन प्रशासन (2021-2025) में एच-1बी नियमों को ढीला किया गया था, लेकिन ट्रंप की वापसी ने इसे उलट दिया।

कानूनी चुनौतियां अपेक्षित हैं। अमेरिकन इमिग्रेशन काउंसिल ने कहा, “यह नीति संविधान के बराबरी के सिद्धांत का उल्लंघन करती है।” भारत सरकार ने भी चिंता जताई है और द्विपक्षीय वार्ता की मांग की है।

संतुलन की तलाश:
ट्रंप की यह नीति अमेरिकी श्रमिकों को प्राथमिकता देने का प्रयास है, लेकिन वैश्विक प्रतिभा प्रवाह को बाधित कर सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे कंपनियां कनाडा या यूरोप जैसे विकल्पों की ओर रुख करेंगी। ट्रंप ने अंत में कहा, “यह कठोर लग सकता है, लेकिन अमेरिका के हित सर्वोपरि हैं। विदेशी मित्रों, आपका स्वागत है—लेकिन हमारे नियमों से।” भविष्य में इस नीति के कार्यान्वयन पर नजर रखना जरूरी होगा, क्योंकि यह वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित करेगी।

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