by-Ravindra Sikarwar
नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पाकिस्तान द्वारा गुप्त रूप से परमाणु परीक्षण कराने के दावे के बाद भारत ने कड़ा रुख अपनाते हुए इस्लामाबाद की परमाणु गतिविधियों पर सवाल उठाए हैं। विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने शुक्रवार को एक मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि पाकिस्तान की “गुप्त और अवैध परमाणु गतिविधियां” उसके दशकों पुराने इतिहास से मेल खाती हैं, जिसमें तस्करी, निर्यात नियंत्रण उल्लंघन, गुप्त साझेदारियां, एक्यू खान नेटवर्क और आगे फैलाव शामिल हैं। भारत ने ट्रंप के बयान पर “नोटिस लिया” है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को पाकिस्तान के परमाणु प्रसार के जोखिमों पर लगातार ध्यान आकर्षित करने की बात दोहराई। यह बयान दक्षिण एशिया में परमाणु तनाव को नई ऊंचाई देने वाला साबित हो रहा है।
ट्रंप का दावा: क्या कहा और क्यों विवादास्पद?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले रविवार को सीबीएस न्यूज के ’60 मिनट्स’ कार्यक्रम में एक साक्षात्कार के दौरान दावा किया कि पाकिस्तान, रूस, चीन और उत्तर कोरिया जैसे देश गुप्त रूप से परमाणु परीक्षण कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान परीक्षण कर रहा है। वे इसके बारे में आपको नहीं बताते। वे जमीन के नीचे परीक्षण करते हैं, जहां लोग नहीं जानते कि क्या हो रहा है। आप सिर्फ थोड़ी सी कंपन महसूस करते हैं।” ट्रंप ने यह दावा अमेरिका द्वारा 30 वर्षों से अधिक समय से परमाणु परीक्षण न करने की नीति को चुनौती देते हुए किया, और संकेत दिया कि वाशिंगटन भी परीक्षण फिर शुरू कर सकता है।
यह बयान व्यापक अटकलों को जन्म दे रहा है, खासकर दक्षिण एशिया में, जहां भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु हथियारों का संतुलन संवेदनशील है। ट्रंप ने मई 2025 के भारत-पाकिस्तान सैन्य टकराव का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने दावा किया कि उनके व्यापारिक समझौतों ने “परमाणु युद्ध” को रोका। हालांकि, अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने स्पष्ट किया कि वाशिंगटन लाइव परमाणु विस्फोटों की योजना नहीं बना रहा, बल्कि उन्नत सिमुलेशन के माध्यम से घटकों का परीक्षण करेगा। पाकिस्तान ने ट्रंप के दावे का खंडन किया है, कहा कि वह न तो पहला परमाणु परीक्षण करने वाला देश था और न ही फिर से परीक्षण शुरू करने वाला होगा।
भारत का आधिकारिक बयान: ऐतिहासिक संदर्भ और चिंताएं
विदेश मंत्रालय के नियमित साप्ताहिक ब्रीफिंग में रंधीर जायसवाल ने ट्रंप के दावे पर सवालों का जवाब देते हुए कहा, “गुप्त और अवैध परमाणु गतिविधियां पाकिस्तान के इतिहास के अनुरूप हैं, जो दशकों से तस्करी, निर्यात नियंत्रण के उल्लंघन, गुप्त साझेदारियों, एक्यू खान नेटवर्क और आगे प्रसार पर केंद्रित है। भारत ने हमेशा वैश्विक समुदाय का ध्यान पाकिस्तान के इन पहलुओं पर आकर्षित किया है। इसी पृष्ठभूमि में, हम राष्ट्रपति ट्रंप के पाकिस्तान के परमाणु परीक्षणों पर टिप्पणी का संज्ञान लिया है।”
यह बयान भारत की लंबे समय से चली आ रही नीति को दर्शाता है, जिसमें पाकिस्तान को परमाणु प्रसार का केंद्र माना जाता है। जायसवाल ने जोर दिया कि भारत “परमाणु ब्लैकमेल” में झुकने वाला नहीं है और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी सीएनएन-न्यूज18 को दिए साक्षात्कार में कहा, “अगर पाकिस्तान या अमेरिका परमाणु परीक्षण कर रहे हैं, तो让他们 करें। हम सही समय पर सही कदम उठाएंगे।” उन्होंने 2019 के बालाकोट हवाई हमले का हवाला देते हुए कहा कि सेना सीमा पार जाकर जवाब देगी।
पाकिस्तान का परमाणु इतिहास: एक्यू खान नेटवर्क और प्रसार के आरोप
पाकिस्तान का परमाणु कार्यक्रम 1970 के दशक में शुरू हुआ, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो ने इसे “इस्लामी बम” का नाम दिया। 1998 में चगाई पहाड़ियों में छह परमाणु परीक्षणों के साथ पाकिस्तान आधिकारिक रूप से परमाणु शक्ति संपन्न देश बना। लेकिन इसका इतिहास विवादों से भरा है। अब्दुल कदीर खान, पाकिस्तान के “परमाणु पिता” के नाम से मशहूर वैज्ञानिक, ने गुप्त नेटवर्क के माध्यम से ईरान, लीबिया और उत्तर कोरिया को यूरेनियम संवर्धन तकनीक बेची। 2004 में खान ने इसे स्वीकार किया, लेकिन बाद में पाकिस्तान सरकार ने उन्हें क्षमा कर दिया।
स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) के अनुसार, जनवरी 2025 तक पाकिस्तान के पास लगभग 170 परमाणु हथियार हैं, जो छोटी दूरी के टैक्टिकल सिस्टम पर केंद्रित हैं। भारत के पास अनुमानित 180 हथियार हैं, लेकिन नई दिल्ली चीन पर नजर रखते हुए लंबी दूरी के हथियार विकसित कर रहा है। पाकिस्तान पर लगातार निर्यात नियंत्रण उल्लंघन के आरोप लगते रहे हैं, जिसमें संवेदनशील सामग्री की तस्करी शामिल है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र और अन्य मंचों पर इन मुद्दों को बार-बार उठाया है।
दक्षिण एशिया में परमाणु संतुलन: भारत vs पाकिस्तान
भारत ने 1974 में ‘स्माइलिंग बुद्धा’ परीक्षण और 1998 में पोखरण-II के साथ अपना परमाणु कार्यक्रम मजबूत किया। भारत की नीति “नो फर्स्ट यूज” (पहले उपयोग न करने) की है, जबकि पाकिस्तान ने इसे स्पष्ट रूप से अस्वीकार किया है। मई 2025 का ऑपरेशन सिंदूर—जिसमें भारत ने पाकिस्तान और PoK में आतंकी ठिकानों पर हमला किया था, पहलगाम हमले (26 मौतें) के जवाब में—ने क्षेत्रीय तनाव बढ़ाया। SIPRI के अनुसार, चीन के 500 से अधिक हथियारों के मुकाबले भारत-पाकिस्तान का संयुक्त आंकड़ा कम है, लेकिन स्थानीय संघर्ष का खतरा हमेशा बना रहता है।
ट्रंप के दावे ने वैश्विक बहस छेड़ दी है, जहां अमेरिका के संभावित परीक्षण फिर से शुरू करने से गैर-प्रसार संधि (NPT) कमजोर हो सकती है। भारत, जो NPT का सदस्य नहीं है, ने हमेशा शांतिपूर्ण उपयोग पर जोर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना दक्षिण एशिया में हथियारों की होड़ को तेज कर सकती है।
पाकिस्तान और वैश्विक प्रतिक्रियाएं:
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने ट्रंप के दावे को “बेबुनियाद” बताते हुए कहा कि इस्लामाबाद परीक्षण न तो शुरू करेगा और न ही फिर से करेगा। उन्होंने भारत के 1998 के परीक्षणों का हवाला दिया। अमेरिका में ऊर्जा विभाग ने स्पष्ट किया कि कोई लाइव परीक्षण नहीं हो रहा। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने पाकिस्तान की निगरानी पर सवाल उठाए हैं, लेकिन कोई आधिकारिक जांच नहीं शुरू की।
यह बयान भारत-पाकिस्तान संबंधों को और जटिल बनाता है, जहां कश्मीर मुद्दा और आतंकवाद पहले से तनाव का कारण हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक दबाव से पाकिस्तान की गतिविधियों पर अंकुश लग सकता है।
