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by-Ravindra Sikarwar

6 नवंबर 2025 को दक्षिण एशिया की राजनीति में एक नया मोड़ आ गया, जब पाकिस्तानी सेना ने कथित तौर पर अफगानिस्तान की सीमा पर गोलीबारी की, जिससे हाल ही में हासिल किए गए युद्धविराम समझौते का स्पष्ट उल्लंघन हुआ। यह घटना तब घटी, जब दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल तुर्की के इस्तांबुल में तीसरे दौर की शांति वार्ताओं में व्यस्त थे। अफगान तालिबान सरकार ने इसे “नागरिक क्षेत्रों पर हमला” बताते हुए कड़ी निंदा की, लेकिन प्रतिकार न करने का फैसला लिया ताकि बातचीत बाधित न हो। पाकिस्तान ने अभी तक इस आरोपों पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है, लेकिन यह घटना दुरंद लाइन (Durand Line) के साथ लंबे समय से चले आ रहे तनाव को और गहरा सकती है। आइए इस घटना की पूरी पृष्ठभूमि, विवरण, दोनों पक्षों के दावों और इसके संभावित परिणामों पर विस्तार से नजर डालें।

घटना का पूरा विवरण: दो बार गोलीबारी, नागरिकों में दहशत
अफगानिस्तान के कंधार प्रांत के स्पिन बोल्डक जिले (Spin Boldak) में स्थित सीमा पर पाकिस्तानी सेना ने गुरुवार को दो बार गोलीबारी की। पहली घटना सुबह के समय हुई, जबकि दूसरी दोपहर में। अफगान सैन्य सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तानी बलों ने हल्के और भारी हथियारों – जैसे मोर्टार और प्रोजेक्टाइल्स – का इस्तेमाल किया, जिससे सीमा के पास बसे गांवों में दहशत फैल गई। स्पिन बोल्डक अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा का एक संवेदनशील क्षेत्र है, जहां चमन (Chaman) जिले के साथ लगभग 2,600 किलोमीटर लंबी दुरंद लाइन गुजरती है।

अफगान रक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि हमले में नागरिक क्षेत्र लक्षित किए गए, लेकिन अफगान सीमा बलों ने उच्च कमान के निर्देश पर कोई जवाबी कार्रवाई नहीं की। “हमारी सेनाओं ने युद्धविराम का पालन किया ताकि नागरिकों की जान न जाए और वार्ता प्रक्रिया प्रभावित न हो,” उन्होंने कहा। तालिबान प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पुष्टि की कि पाकिस्तानी हमले से स्थानीय निवासियों में घबराहट फैल गई। उन्होंने कहा, “पाकिस्तानी सेना ने सीमा पार फायरिंग शुरू की, लेकिन हमारी सेनाओं ने प्रतिक्रिया न देकर वार्ताकारों का सम्मान किया।”

घटना के समय तुर्की के इस्तांबुल में पाकिस्तान और अफगान प्रतिनिधिमंडलों की बैठक चल रही थी, जहां युद्धविराम को मजबूत करने और निगरानी तंत्र स्थापित करने पर चर्चा हो रही थी। यह उल्लंघन न केवल कूटनीतिक प्रयासों को झटका देता है, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता पर भी सवाल खड़े करता है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, पिछले महीने की झड़पों में 70 से अधिक लोग मारे गए थे, जिसमें 50 अफगान नागरिक शामिल थे।

पृष्ठभूमि: दुरंद लाइन पर लंबे समय से चला आ रहा विवाद
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव की जड़ें दुरंद लाइन में निहित हैं, जो 1893 में ब्रिटिश काल में खींची गई थी। अफगानिस्तान इसे अपनी संप्रभुता पर हमला मानता है, जबकि पाकिस्तान इसे अपनी अंतरराष्ट्रीय सीमा बताता है। तालिबान के 2021 में सत्ता में आने के बाद से संबंध और खराब हो गए हैं। पाकिस्तान अफगान मिट्टी पर सक्रिय तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) जैसे उग्रवादी समूहों को पनाह देने का आरोप लगाता है, जबकि काबुल इन दावों को सिरे से नकारता है।

  • सितंबर-अक्टूबर 2025 की घटनाएं: 9 अक्टूबर को काबुल में विस्फोट हुए, जिसमें 70 से अधिक लोग मारे गए। तालिबान ने पाकिस्तान पर हवाई हमलों का आरोप लगाया, जिसे इस्लामाबाद ने न तो स्वीकार किया और न ही खारिज। इसके जवाब में 11-15 अक्टूबर को सीमा पर भारी गोलीबारी हुई, जिसमें अफगानिस्तान ने पाकिस्तानी चौकियों पर हमला किया। अफगान दावे: 58 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए। पाकिस्तानी आंकड़े: 23 सैनिक शहीद, 200 से अधिक “तालिबान आतंकी” ढेर।
  • शांति प्रयास: सऊदी अरब और कतर की मध्यस्थता से 19 अक्टूबर को दोहा (कतर) में प्रारंभिक युद्धविराम हुआ। तुर्की की मध्यस्थता में दो दौर की वार्ताएं हुईं – पहली दोहा में और दूसरी इस्तांबुल में। 31 अक्टूबर को तुर्की विदेश मंत्रालय ने घोषणा की कि दोनों पक्ष युद्धविराम बढ़ाने और उल्लंघन पर दंड के लिए निगरानी तंत्र पर सहमत हुए। तीसरा दौर 6 नवंबर को शुरू हुआ, लेकिन उसी दिन यह उल्लंघन हो गया।

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने वार्ता से पहले चेतावनी दी थी कि यदि बातचीत विफल हुई, तो “युद्ध” हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान TTP पर दबाव बनाने के लिए सैन्य कार्रवाई को हथियार बना रहा है, जबकि तालिबान इसे क्षेत्रीय संप्रभुता का उल्लंघन बता रहा है।

दोनों पक्षों के दावे और प्रतिक्रियाएं:

  • अफगानिस्तान का पक्ष: तालिबान सरकार ने इसे “युद्धविराम का घोर उल्लंघन” बताया। रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता इनायतुल्लाह खावराजमी ने कहा, “हमारे बलों ने मध्य रात्रि तक जवाबी कार्रवाई की, लेकिन अब युद्धविराम का पालन कर रहे हैं।” अफगान विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी ने पाकिस्तान से स्पष्टीकरण मांगा, “यह समझौते को कमजोर करता है।” काबुल ने संयुक्त राष्ट्र और क्षेत्रीय देशों से हस्तक्षेप की अपील की।
  • पाकिस्तान का पक्ष: इस्लामाबाद ने अभी तक कोई बयान जारी नहीं किया है। हालांकि, पाकिस्तानी सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अतीत में कहा था कि अफगानिस्तान TTP जैसे समूहों के लिए “आधार” प्रदान कर रहा है। पाकिस्तान ने अक्टूबर में पक्तिका प्रांत में “लक्षित हवाई हमले” किए थे, जिन्हें आतंकी ठिकानों पर प्रहार बताया। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के कार्यकाल में TTP के साथ युद्धविराम प्रयास हुए थे, लेकिन 2022 के बाद हमले बढ़ गए।

तुर्की के विदेश मंत्रालय ने वार्ता के दौरान “शांति बनाए रखने” पर जोर दिया, लेकिन उल्लंघन की पुष्टि नहीं की। कतर और सऊदी अरब जैसे मध्यस्थ चुप्पी साधे हुए हैं, जबकि भारत ने अफगान विदेश मंत्री के हालिया दौरे के बाद पाकिस्तान की “कड़ी नोटिस” ली है।

संभावित परिणाम: कूटनीति पर खतरा, क्षेत्रीय अस्थिरता
यह उल्लंघन युद्धविराम को कमजोर कर सकता है, जिससे सीमा पर नई झड़पें भड़क सकती हैं। स्टिमसन सेंटर के वरिष्ठ फेलो असफंदयार मीर के अनुसार, “पाकिस्तान ने सैन्य दबाव से तालिबान को घेरा है, लेकिन यह कूटनीति को नुकसान पहुंचा रहा है।” यदि वार्ता विफल हुई, तो सीमा पार व्यापार (जो 2024 में $2 बिलियन से अधिक था) ठप हो सकता है, और लाखों शरणार्थी प्रभावित होंगे।

विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि TTP जैसे समूहों की सक्रियता से पाकिस्तान में आतंकी हमले बढ़ सकते हैं, जबकि अफगानिस्तान की आर्थिक कमजोरी (GDP में 20% गिरावट) तनाव को और बढ़ाएगी। संयुक्त राष्ट्र ने अपील की है कि दोनों पक्ष “रचनात्मक संवाद” से समस्याओं का समाधान करें।

शांति की राह में एक और बाधा:
पाकिस्तान द्वारा कथित गोलीबारी अफगानिस्तान-पाकिस्तान संबंधों में नया संकट पैदा कर रही है, जो दक्षिण एशिया की स्थिरता के लिए खतरा है। तुर्की में चल रही वार्ताएं अब एक कठिन परीक्षा से गुजर रही हैं – क्या दोनों पक्ष विश्वास बहाल कर पाएंगे, या सैन्य कार्रवाई फिर हावी हो जाएगी? अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अब सक्रिय भूमिका निभानी होगी, ताकि युद्धविराम टूटने से पहले ही इसे मजबूत किया जा सके। यह घटना याद दिलाती है कि सीमाओं के पार शांति केवल संवाद से ही संभव है, न कि हथियारों से।

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