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By: Ravindra Sikarwar

मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी कहे जाने वाले ग्वालियर में आयोजित होने वाले भव्य तानसेन समारोह का हर वर्ष देश-दुनिया के संगीत प्रेमियों को बेसब्री से इंतज़ार रहता है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए मप्र संस्कृति विभाग ने 101वें तानसेन समारोह 2025 के शुभारंभ सत्र के लिए इस वर्ष के सर्वश्रेष्ठ कलाकारों के नामों की औपचारिक घोषणा कर दी है। विभाग के अनुसार, तानसेन अलंकरण 2024 के लिए मुंबई के प्रख्यात शास्त्रीय गायक पं. राजा काले को चुना गया है, जबकि साल 2025 का अलंकरण कोलकाता के विख्यात संतूर वादक पं. तरुण भट्टाचार्य को प्रदान किया जाएगा। यह घोषणा संगीत जगत के लिए गौरव का विषय मानी जा रही है, क्योंकि दोनों ही कलाकार भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा के सशक्त स्तंभ हैं।

तानसेन अलंकरण: भारतीय संगीत जगत का प्रतिष्ठित सम्मान
तानसेन अलंकरण भारतीय संगीत क्षेत्र का एक अत्यंत प्रतिष्ठित सम्मान है, जो उन कलाकारों को प्रदान किया जाता है जिन्होंने शास्त्रीय संगीत की परंपरा, साधना और गंभीरता को देश-दुनिया में विशेष पहचान दिलाई है। मध्य प्रदेश शासन द्वारा दिया जाने वाला यह अलंकरण महान संगीतज्ञ मियां तानसेन की स्मृति में प्रदान किया जाता है। हर वर्ष यह घोषणा तानसेन समारोह के आयोजन से पहले की जाती है, जो ग्वालियर के सांस्कृतिक उत्सवों में प्रमुख स्थान रखता है।

इस वर्ष भी संस्कृति विभाग ने ऐसे ही दो रत्नों को चुना है, जिनकी साधना और योगदान भारतीय शास्त्रीय संगीत को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहे हैं।

पंडित राजा काले: तानसेन अलंकरण 2024 के अधिकारी कलाकार
मुंबई के वरिष्ठ शास्त्रीय गायक पंडित राजा काले कई दशकों से हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की साधना में रमे हुए हैं। उनकी गायकी में परंपरागत घरानों की गहराई, रागों की शुद्धता और भावपूर्ण प्रस्तुतियों की झलक साफ दिखाई देती है।

पंडित काले ने अपनी संगीत यात्रा की शुरुआत बेहद कम उम्र में कर दी थी। उन्होंने गुरु-शिष्य परंपरा के तहत कई महान गुरुओं से मार्गदर्शन प्राप्त किया। उनकी शैली में खयाल, तराना और विविध रागों की अनुभूति स्पष्ट दिखती है।

वर्ष 2024 के तानसेन अलंकरण के लिए उनका चयन भारतीय संगीत जगत के लिए गर्व की बात है। यह उनके लंबे समर्पण, साधना और संगीत के प्रति गहरी निष्ठा का सम्मान है। शास्त्रीय संगीत को लोकप्रिय बनाने में उनका योगदान सराहनीय रहा है। देश-विदेश में आयोजित अनगिनत संगीत समारोहों में वे भारतीय सुरों की गरिमा का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।

पंडित तरुण भट्टाचार्य: 2025 के लिए चुने गए अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त संतूर वादक
कोलकाता के विख्यात संतूर वादक पंडित तरुण भट्टाचार्य दुनिया भर में भारतीय शास्त्रीय संगीत के ब्रांड एंबेसेडर के रूप में जाने जाते हैं। उनकी उंगलियों द्वारा संतूर पर उकेरे गए सुर संगीत प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर देते हैं।

पं. भट्टाचार्य ने संतूर को न सिर्फ देश में, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी नई पहचान दी है। उन्होंने कई वैश्विक संगीत समारोहों में भारत का प्रतिनिधित्व किया है और संतूर की तकनीक को आधुनिक दृष्टि के साथ विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

तानसेन अलंकरण 2025 के लिए उनका चयन इस बात का प्रमाण है कि भारतीय शास्त्रीय संगीत आज भी वैश्विक स्तर पर अपनी सुरीली पहचान बनाए हुए है। उनकी प्रस्तुतियों में सुर, ताल और भाव का अद्भुत सामंजस्य देखने को मिलता है, जो श्रोताओं को आध्यात्मिक अनुभव की ओर ले जाता है।

101वां तानसेन समारोह 2025: संगीत साधना का उत्सव
ग्वालियर में आयोजित होने वाला 101वां तानसेन समारोह अपने गौरवपूर्ण इतिहास के साथ नए अध्याय की शुरुआत करने जा रहा है। समारोह में देश-विदेश के श्रेष्ठ कलाकार अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से तानसेन की परंपरा को आगे बढ़ाते हैं।

इस आयोजन के दौरान तानसेन अलंकरण प्रदान किया जाता है, जो कलाकारों के लिए एक अत्यंत सम्मानजनक क्षण होता है। इस वर्ष पं. राजा काले और अगले वर्ष पं. तरुण भट्टाचार्य का सम्मान समारोह को और भी अधिक विशेष बनाने वाला है।

मध्य प्रदेश संस्कृति विभाग द्वारा घोषित तानसेन अलंकरण 2024 और 2025 के विजेताओं के नामों ने पूरे संगीत जगत में हर्ष का वातावरण बना दिया है।
पंडित राजा काले और पंडित तरुण भट्टाचार्य जैसे कलाकार भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध विरासत के वास्तविक संरक्षक हैं।

उनका चयन न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धियों का सम्मान है, बल्कि इससे भारत की सांस्कृतिक धरोहर को भी नई ऊर्जा मिलती है।